नई दिल्ली - प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने आज आठवें एशिया गैस भागीदारी सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड – गेल की महाराष्ट्र में दाभोल से कर्नाटक में बंगलूरू तक की 1000 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन राष्ट्र को समर्पित की। इस अवसर पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री डॉ. एम. वीरप्पा मोइली और राज्य मंत्री पनाबाका लक्ष्मी भी मौजूद थीं।
इस अवसर पर डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा कि गेल का पिछले वर्षों में तेजी से विकास हुआ है और यह विविधता वाला संगठन बन गया है। आज गेल हमारे सबसे अच्छे सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में से एक है और इसे महारत्न की श्रेणी में रखा गया है।
दाभोल बंगलूरू पाइपलाइन से दक्षिण भारत पहली बार राष्ट्रीय गैस ग्रिड से जुड़ गया है। इस पर 4,500 करोड़ रुपए का खर्च आया है। 1.6 करोड़ मीट्रिक घनमीटर प्रति दिन की प्राकृतिक गैस क्षमता की इस गैस पाइपलाइन से हर रोज 3000 मेगावॉट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जा सकता है।
यह पाइपलाइन बेलगाम, धारवाड़, गडग, बेल्लारी, दावणगेरे, चित्रदुर्ग, तुमकुर, रामानगरम, बंगलूरू ग्रामीण और बंगलूरू शहरी जि़लों से गुजरती है। इसके रास्ते में 18 राष्ट्रीय राजमार्ग, 382 सड़कें, 20 रेलवे क्रॉसिंग, 83 अन्य क्रॉसिंग, 11 बड़े नदी क्रॉसिंग और 276 जलभंडार क्रॉसिंग आते हैं। सबसे बड़ा नदी क्रॉसिंग घाटप्रभा के चट्टानी क्षेत्र में है। 19 महीनों तक दिन-रात चले इसके निर्माण में दुनिया के सबसे बड़े 60 से 70 डिग्री के ढलान में पाइपलाइन बिछाई गई और साढ़ तीन किलोमीटर के हिस्से में यह पाइपलाइन 700 मीटर ऊंचाई तक ले जाई गई।
विश्व में बदलते ऊर्जा परिदृश्य के बारे में प्रधानमंत्री ने कहा कि शेल गैस की खोज से इस क्षेत्र में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है और भारत को शेल गैस के भंडार खोजने की उम्मीद है।
भारत को अगले दो दशकों में अपनी ऊर्जा आपूर्ति तीन से चार गुणा बढ़ानी होगी। इस समय भारत विश्व का सातवां सबसे बड़ा ऊर्जा उत्पादक देश है। विश्व के कुल वार्षिक ऊर्जा उत्पादन में इसका हिस्सा लगभग 2.5 प्रतिशत है। ऊर्जा खपत के मामले में भारत चौथा सबसे बड़ा देश है। भारत में कुल ऊर्जा खपत में से मुख्य रूप से लगभग 41 प्रतिशत खपत तेल और गैस की है और 2020 तक उम्मीद है भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा खपत करने वाला देश बन जाएगा।
उन्होंने कहा कि मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को पूरा करने के लिए हम घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों को समुद्र तट पर और समुद्र के अदंर ईंधन की खोज करने के लिए बढ़ावा दे रहे हैं। मैं इस अवसर पर निवेशकों को आश्वासन देना चाहूंगा कि हमारी सरकार ऊर्जा के नये स्रोतों की खोज के लिए अनुकूल और स्थिर नीतियां जारी रखेगी।
ऊर्जा सुरक्षा प्राप्त करने के लिए भारत लगातार अन्य विकल्पों पर भी ध्यान दे रहा है। इनमें से एक विकल्प अन्य देशों में ऊर्जा संपत्तियों के अधिग्रहण का है। इससे न केवल हमें ऊर्जा की आपूर्ति के नये स्रोत उपलब्ध होंगे, बल्कि नवीनतम प्रौद्योगिकी की जानकारी भी प्राप्त होगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र के लिए यह एक महत्वपूर्ण मंच है। इस सम्मेलन की दस वर्ष पहले एक साधारण सी शुरूआत हुई थी, लेकिन अब यह विकसित हो गया है और इससे गैस पाइपलाइन के विकास, एलएनजी टर्मिनल, पेट्रो-रसायन, गैस व्यापार केन्द्र और नगरों में गैस वितरण की परियोजनाओं जैसे क्षेत्रों में संयुक्त निवेश करने के बहुत अच्छे अवसर पैदा हुए हैं।
सम्मेलन में डॉ. मोइली ने कहा कि भारत सहित ऐशिया के उभरते बाजार प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल में दस गुणा से भी अधिक वृद्धि दर्शा रहे हैं, जबकि विकसित देशों के बाजार केवल 5 प्रतिशत वृद्धि दर्शा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने वर्ष 2030 तक देश की मौजूदा पाइपलाइन की लम्बाई 15,000 किलोमीटर से बढ़ाकर 30,000 किलोमीटर करने की योजना बनाई है, ताकि ऊर्जा के मामले में उस समय तक देश आत्मनिर्भर हो जाए। उन्होंने कहा कि तुर्कमेनिस्तान-अफगानिस्तान-पाकिस्तान-भारत पाइपलाइन परियोजना भागीदार देशों के सहयोग से 2017-18 तक पूरी हो जाने की उम्मीद है।
डॉ. मोइली ने एशियाई गैस हब विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि गैस निर्यातकों को विश्व में कारोबार के नये अवसर मिल रहे हैं, लेकिन एलएनजी के दीर्घावधि अनुबंधों के लिए उन्हें स्पर्धात्मक चुनौतियों का सामना करना होगा। गैस उत्पादकों द्वारा अलग-अलग दाम रखने के बारे में एलएनजी की खपत करने वाले देशों की चिंताओं को विभिन्न अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर उठाया गया है, जिनमें एलएनजी के दाम निर्धारित करने के लिए एशियाई गैस हब बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
इस अवसर पर तुर्कमेनिस्तान के तेल और गैस उद्योग तथा खनिज संसाधनों के मंत्री मुहम्मेतनुर हालिलोव भी मौजूद थे।
8वें एशिया गैस भागीदारी सम्मेलन का आयोजन भारतीय गैस प्राधिकरण लिमिटेड (गेल) और भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल परिसंघ (फिक्की) नेकिया है। दो दिन के इस सम्मेलन में दुनिया भर से गैस उद्योगों के प्रमुखों के भाग लेने की संभावना है। सम्मेलन में 16 देशों के 46 वक्ता और 800 से अधिक प्रतिनिधि होंगे। इस सम्मेलन का विचारणीय विषय है- ''एशिया गैस बाजार : बदलते परिदृश्य में चुनौतियां और अवसर।'' इसके छह कारोबारी अधिवेशन और एक विशेष अधिवेशन होगा, जिनमें इस क्षेत्र से जुड़े सर्वश्रेष्ठ वक्ता भाग लेंगे।