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ओमप्रकाश वाल्मीकि को श्रद्घांजलि

Updated on Wednesday, November 20, 2013 12:55 PM IST

हिन्दी के मशहूर साहित्यकार ओमप्रकाश वाल्मीकि का देहरादून के एक अस्पताल में निधन हो गया. वे 67 साल के थे.
उनके दामाद वीरेश्वर वशिष्ठ ने बताया कि रविवार सुबह आठ बजे उनका निधन हो गया. उन्होंने बताया कि बीमारी की वजह से वो बहुत कमजोर हो चुके थे इसलिए उन्हें दिल्ली ले जाना संभव नहीं था.
ओमप्रकाश वाल्मीकि का जन्म 30 जून 1950 को उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले के बरला गांव में हुआ था.
हिंदी में दलित साहित्य के विकास में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका रही. उन्होंने अपने लेखन में जातीय-अपमान और उत्पीड़न का जीवंत वर्णन किया है और भारतीय समाज के कई अनछुए पहलुओं को पाठकों के सामने प्रस्तुत किया है. 'जूठन' ओमप्रकाश वाल्मीकि हिन्दी के जाने-माने दलित साहित्यकार थे और उनकी आत्मकथा 'जूठन' साहित्य जगत की बेहद चर्चित कृति है.
इसके अलावा दलित साहित्य का सौंदर्य शास्त्र, मुख्यधारा और दलित साहित्य, सफाई देवता जैसी उनकी प्रमुख रचनाएं हैं.
साहित्य में अप्रतिम योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया था.
वे देहरादून स्थित ऑर्डिनेंस फॅक्ट्री में एक अधिकारी के रूप में काम करते हुए अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए थे और उसके बाद से देहरादून में ही रह रहे थे.

हरियाणा ग्रन्थ अकादमी में हिंदी के चर्चित रचनाकार ओमप्रकाश वाल्मीकि के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया गया। अकादमी में श्रद्घांजलि सभा आयोजित की गई। ग्रन्थ अकादमी के उपाध्यक्ष व कथाकार कमलेश भारतीय ने कहा कि वाल्मीकि की आत्मकथा जूठन उनका श्रेष्ठï योगदान कहा जा सकता है। इसमें उन्होंने जो स्वयं सहा और भोगा उसका प्रभावशाली ढंग से वर्णन किया। इसे बहुत चर्चा मिली। शोकसभा में निदेशक डॉ. डॉ. मुक्ता ने भी वाल्मीकि के योगदान की चर्चा करते कहा कि वाल्मीकि की रचनाओं से दलित विमर्श को गति मिली।

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