नई दिल्ली - पिछले दशक से कच्ची वस्तुओं, थोक कीमत सूचकांक, सेवाओं की कीमतों आदि में कई गुना बढ़ोत्तरी हुई है, इसको देखते हुए भारतीय रेलवे ने राजधानी, शताब्दी और दुरन्तो रेलगाडि़यों के लिए संशोधित व्यंजन और शुल्क सूची बनाई है जो 17 अक्टूबर, 2013 से लागू है। लम्बी दूरी की राजधानी/दुरन्तों रेलगाडि़यों में बारी-बारी से मिलने वाले भोजन के स्थान पर मिलाजुला भोजन परोसा जाएगा, जो आम भोजन से आधी कीमत पर मिलेगा, जिससे भोजन की बरबादी भी कम होगी। हालांकि कुछ यात्रियों द्वारा इन बदलावों की आलोचना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जांच के लिए ऐसी रेलगाडि़यों में तैनात किया गया। यात्रियों की प्रतिक्रिया को देखते हुए मिले-जुले भोजन के स्थान पर अब आम भोजन दिया जा रहा है। कुछ व्यंजनों की मात्रा जो कम कर दी गयी थी उसे पहले जैसा ही कर दिया गया है। विविधता को बनाए रखने के लिए चक्रीय व्यंजन (साइकिलिक मेन्यू) सूची तैयार की गयी है। यात्रियों को संपूर्ण क्वालिटी भोजन देने के लिए रेलवे हरसंभव प्रयास कर रहा है। क्वा्लिटी और साफ सफाई का ध्यान रखने के लिए रेलवे कर्मियों / वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात कर निरीक्षण और निगरानी मजबूत की जा रही है। यात्रियों की प्रतिक्रिया लगातार ली जाएगी।
राजधानी/शताब्दी /दुरन्तों रेलगाडि़यों में व्यंजन और शुल्क सूची टिकट की राशि में शामिल है और इसमें 1999 से कोई संशोधन नहीं किया गया है। बढ़ती कीमतों को देखते हुए बोर्ड ने संशोधित दरों की सिफारिश के लिए एक समिति बनाई थी। इस समिति ने साफ सुथरा और सामर्थ्यं के अनुरूप कई तरह के व्यंजन यात्रियों को परोसने के लिए कीमतों की सभी पक्षों का वैज्ञानिक परीक्षण करने के बाद यह सुझाव दिया था। समिति की रिपोर्ट के आधार पर संशोधित व्यंजन और शुल्क सूची 17 अक्टूबर, 2013 से लागू की गयी थी।