सीएसआईआर–सीरी, पिलानी द्वारा विकसित ‘मेडिसिंक’ तकनीक का हस्तांतरण
पिलानी, 2 अप्रैल, सीएसआईआर – केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीरी), पिलानी ने स्वास्थ्य-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए रोगी की स्मार्ट मॉनीटरिंग के लिए विकसित आईओटी आधारित प्लैटफॉर्म “मेडिसिंक” का तकनीकी हस्तांतरण किया। यह प्रौद्योगिकी हस्तांतरण मेसर्स वर्टेक्स मेडिटेक को 1 अप्रैल 2026 को सफलतापूर्वक किया गया। तकनीकी हस्तांतरण संबंधी दस्तावेजों के आदान-प्रदान कार्यक्रम में वर्टेक्स मेडिटेक की ओर से संदीप मुद्गल एवं विवेक यादव तथा सीएसआईआर-सीरी की ओर से डॉ नीरज कुमार सहित टीबीडी टीम के सदस्य उपस्थित रहे।
संस्थान के निदेशक डॉ पी सी पंचारिया ने डॉ सत्यम श्रीवास्तव के नेतृत्व में प्रौद्योगिकी का विकास करने वाली टीम के सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि “मेडिसिंक” जैसी स्वदेशी तकनीकें देश में डिजिटल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। साथ ही, यह तकनीक विशेष रूप से दूर-दराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच बढ़ाने में भी सहायक होगी।
क्या है मेडिसिंक (MEDISYNC) तकनीक
यह CSIR-CEERI में विकसित “मेडिसिंक” एक उन्नत स्मार्ट आईओटी-आधारित मल्टीपैरामीटर पेशेंट मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म है, जो ईसीजी, ऑक्सीजन सैचुरेशन, पल्स रेट, नॉन-इनवेसिव ब्लड प्रेशर तथा शरीर का तापमान जैसे महत्वपूर्ण वाइटल्स को उच्च सटीकता के साथ मापने में सक्षम है। यह प्रणाली इंटेलिजेंट सेंसिंग आर्किटेक्चर पर आधारित है, जिसमें उन्नत सिग्नल प्रोसेसिंग एवं नॉइज़ रिडक्शन एल्गोरिद्म के माध्यम से विश्वसनीय एवं क्लिनिकली उपयोगी डेटा प्राप्त होता है। यह डिवाइस रियल-टाइम डेटा एक्विज़िशन एवं क्लाउड कनेक्टिविटी के माध्यम से मरीज की जानकारी को सुरक्षित रूप से सर्वर पर ट्रांसफर करती है, जिससे डॉक्टर कहीं से भी मरीज की निगरानी कर सकते हैं।
इस प्रौद्योगिकी-विकास टीम में सीएसआईआर-सीरी के वैज्ञानिक डॉ सत्यम श्रीवास्तव की अगुवाई में सूरज मुखिया एवं आकाश वाघरे का महत्वपूर्ण योगदान रहा। प्रौद्योगिकी के संबंध में बताते हुए डॉ सत्यम ने कहा कि इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य किफायती, विश्वसनीय एवं कनेक्टेड पेशेंट मॉनिटरिंग समाधान प्रदान करना है, जिससे चिकित्सकों को समय पर और सटीक निर्णय लेने में सहायता मिल सके।
मीडिया एवं जनसंपर्क अधिकारी रमेश बौरा ने बताया कि इस तकनीक के औद्योगिक हस्तांतरण से इसके व्यावसायिक उत्पादन एवं व्यापक उपयोग का मार्ग प्रशस्त हुआ है, जिससे मेक इन इंडिया एवं आत्मनिर्भर भारत अभियानों को बल मिलेगा तथा देश में स्वदेशी चिकित्सा उपकरणों के विकास को नई दिशा मिलेगी।