छात्रों, शोधकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं और विज्ञान–प्रेमियों को राष्ट्रीय विज्ञान आंदोलन से जोड़ने का मंच है यह विज्ञान महोत्स्व
पिलानी/जयपुर, 14 नवंबर, सीएसआईआर–केंद्रीय इलेक्ट्रॉ निकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीरी) के जयपुर कैम्पस में भारत अंतरराष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ–2025) के औपचारिक शुभारंभ के रूप में कर्टन रेज़र कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन विज्ञान भारती (विभा), राजस्थान के सहयोग से हाइब्रिड मोड में किया गया। कार्यक्रम का आरंभ दीप प्रज्वलन और उद्घाटन संबोधन से हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. अनूप एस. महाजन, वैज्ञानिक–एफ, आईआईटीएम, पुणे थे।
सीएसआईआर-सीरी, पिलानी के निदेशक डॉ. पी. सी. पंचरिया ने स्वागत संबोधन देते हुए भारत की वैज्ञानिक–तकनीकी उपलब्धियों तथा नवाचार–आधारित विकास मॉडल की दिशा में हो रहे तीव्र प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सीएसआईआर-सीरी राष्ट्रीय वैज्ञानिक तंत्र का प्रमुख संस्थान होने के नाते उन्नत अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और क्षमता निर्माण के माध्यम से राष्ट्र की वैज्ञानिक प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। विज्ञान भारती, राजस्थान के सचिव एवं आईआईएसएफ–2025 के राष्ट्रीय समन्वयक (S&T Hackathon) डॉ. मेघेंद्र शर्मा ने आगामी उत्सव की रूपरेखा, प्रमुख आयोजनों और विविध विषय-क्षेत्रों से संबंधित जानकारी दी।
मुख्य अतिथि डॉ. अनूप एस. महाजन, ने भारत की वायुमंडलीय एवं पर्यावरणीय विज्ञान में बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए युवा वैज्ञानिकों और छात्रों को डेटा–आधारित अनुसंधान, बहु-विषयी नवाचार और जलवायु–लचीली तकनीकों के विकास में सक्रिय भागीदारी हेतु प्रेरित किया। इस वर्ष के IISF में सायंस ऑन स्फीयर, एंबैसडर्स एवं साइंस कांसुलेट्स मीट, थॉट लीडर्स राउंड टेबल, हैकाथॉन, स्टार्टअप जर्नीज़, विज़न संसद, क्लीन एनर्जी, विज्ञान ग्राम—नया नालंदा, गुरुकुल कार्यशाला, नारी शक्ति, युवा वैज्ञानिक सम्मेलन, जैव अर्थव्यवस्था, क्वांटम टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर तकनीक, UAVs, विज्ञानिका, मीडिया कॉन्क्लेव, NSOIM तथा विज्ञान–प्रौद्योगिकी–रक्षा–अंतरिक्ष प्रदर्शनी जैसे अनेक जीवंत आयोजन शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य विज्ञान को समाज, उद्यमिता, सतत विकास और वैश्विक सहयोग से जोड़ना है।
‘आईआईएसएफ 2025’ की थीम “विज्ञान से समृद्धि: आत्मनिर्भर भारत के लिए” है। यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि का परिणाम है जिसमें विज्ञान को मानव–केंद्रित विकास, नवाचार और समाधान आधारित प्रगति का आधार माना गया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा व्यक्त विचार—“हर वैज्ञानिक खोज का लाभ जनता तक पहुँचना चाहिए”—भी इसी भावना को सुदृढ़ करते हैं।
गौरतलब है कि यह विज्ञान महोत्सयव आगामी 6-9 दिसंबर 2025 के दौरान पंजाब विश्वरविद्यालय, चंडीगढ़ में आयोजित किया जाएगा और सीएसआईआर की प्रयोगशालाएं इन कर्टन रेज़र के माध्य5म से महोत्सलव के व्यािपक प्रचार-प्रसार कर रही हैं। यह कर्टन रेज़र कार्यक्रम IISF–2025 की आधिकारिक शुरुआत का प्रतीक है, जो छात्रों, शोधकर्ताओं, नवाचारकर्ताओं और विज्ञान–प्रेमियों को इस राष्ट्रीय विज्ञान आंदोलन से जोड़ते हुए “समाज के लिए विज्ञान, और आत्मनिर्भरता के लिए विज्ञान” की भारत की प्रतिबद्धता को पुनः सुदृढ़ करता है।
कार्यक्रम का समन्वयन प्रधान वैज्ञानिक डॉ. विजय चटर्जी द्वारा किया गया तथा प्रभारी वैज्ञानिक डॉ साई के. वड्डाडी ने धन्यववाद ज्ञापित किया।