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आर्ट इंटीग्रेशन विषय पर बिरला शिशु विहार द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

Updated on Saturday, November 30, 2024 15:02 PM IST

पिलानी - शिक्षकों के सतत व्यावसायिक विकास (सीपीडी) हेतु "आर्ट इंटीग्रेशन" विषय पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, अजमेर द्वारा एक दिवसीय (नवंबर 30, 2024 ) कार्यशाला का आयोजन बिरला शिशु विहार प्रांगण में किया गया | कार्यशाला में सभी शिक्षक - शिक्षिकाओं ने भाग लिया | 

कार्यशाला की प्रवक्ता सुश्री. शालिनी चौधरी, प्राचार्य राजस्थान स्कूल, जयपुर (राजस्थान) व श्रीमती अर्चना शर्मा, उपप्रधानाचार्या, श्रीमती जानकी देवी मंडेलिया स्कूल पिलानी थी | विद्यालय के प्राचार्य श्री पवन वशिष्ठ द्वारा प्रवक्ताओं को पुष्प गुच्छ भेंट कर उनका स्वागत किया | कार्यशाला की समन्वयिका श्रीमति हेमा जोशी द्वारा स्वागत भाषण प्रस्तुत कर कार्यशाला का शुभारंभ करवाया | 

कार्यशाला में उपस्थित शिक्षक गण को संबोधित करते हुए सुश्री. शालिनी चौधरी ने आर्ट इंटीग्रेशन की नवीन शिक्षण पद्धतियों से अध्यापकों को अवगत कराया | उन्होंने कहा कि कला संस्कृति का प्रतिबिंब है और विविध कलाओं को सीखने और उनका उपयोग करने से छात्रों को अपने आसपास की दुनिया की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलती है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यक्रम रूपरेखा (NCF) के अनुसार कला को मुख्य विषयों के साथ एकीकृत करने से विद्यार्थियों की आलोचनात्मक सोच, नवाचार और संज्ञानात्मक क्षमताओं में सुधार होता है । इसी को दृष्टिगत रखते हुए शिक्षकों को रचनात्मकता, तार्किक सोच, कला समेकित शिक्षण , सहभागिता और समग्र शिक्षा के नवीन आयामों को अपने शिक्षण में शामिल करना चाहिए । उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे कला- एकीकृत नवाचारों और प्रभावी पाठ- योजना के निर्माण से संबंधित बहुमूल्य विचार सभी के साथ साझा किये ।

पहले सत्र में, श्रीमती अर्चना शर्मा ने आर्ट इंटीग्रेशन के महत्व और क्षमता पर प्रकाश डाला आर्ट इंटीग्रेशन पाठ योजनाएँ तैयार करने और सभी शैक्षिक स्तरों पर विभिन्न विषयों में विभिन्न कला रूपों का उपयोग करने पर चर्चा का नेतृत्व किया। पूरे दिन, शिक्षकों ने व्यावहारिक गतिविधियों और समूह प्रस्तुतियों में भाग लिया, जिससे चर्चा किए गए विषयों की उनकी समझ बढ़ी। कार्यशाला ने स्टार्टअप उपकरणों के रूप में विभिन्न कला कृतियों, विशेष रूप से सिद्धांतों के उपयोग के महत्व और कक्षाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की है। 

 कार्यशाला के समापन पर प्राचार्य श्री पवन वशिष्ठ ने दोनों प्रवक्ताओं को समृति चिन्ह भेंटकर कर उनका सामान किया और कार्यशाला हेतु उनका धन्यवाद ज्ञापित किया | कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए कार्यशाला समन्वयिका श्रीमति हेमा जोशी व विशेष सहयोग के लिए श्री विजय तोला का आभार व्यक्त किया |

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