पिलानी - बिट्स पिलानी, पिलानी परिसर मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग और इंडियन कॉउन्सीलग ऑफ र्वल्ड अफेयर के सहयोग से "इंडियन फोरेन पॉलिसी पोस्ट जी-20" पर पैनल डिसक्शन का आयोजन किया गया । इस पैनल डिसक्शन का शुभारंम्भ श्री हितेश जे. राजपाल, आई.एफ.एस, निदेशक, आई.सी.डब्लू.ए, पिलानी परिसर के निदेशक प्रोफेसर सुधीरकुमार बरई, सीनियर प्रोफेसर चन्द्रशेखर और मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफेसर संगीता शर्मा द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया ।
यह पैनल डिसक्शन जी-20 शिखर सम्मेलन आयोजन के बाद भारतीय विदेश नीति की उभरती रूपरेखा की जांच पर केंद्रित था। प्रतिष्ठित राजनयिक, शिक्षाविद और विद्वान वैश्विक शासन में भारत की बदलती भूमिका और बहुध्रुवीय दुनिया में इसकी विदेश नीति प्राथमिकताओं पर विचार-विमर्श करने के लिए एकत्र हुए ।
कार्यक्रम की शुरुआत आई.एफ.एस अधिकारी श्री हितेश जे. राजपाल के संबोधन से हुई, जिन्होंने “भारतीय विदेश नीति के 77 वर्षों“ के बारे में चर्चा की और इस बात पर जोर दिया कि कैसे भारत का दृष्टिकोण गुटनिरपेक्षता से बहु-संरेखण तक विकसित हुआ है, जिससे कारण इसकी रणनीतिक स्वायत्तता में वृद्धि हुई है। श्री राजपाल ने भारत को अपनी उपलब्धियों को संस्थागत बनाने और समावेशी वैश्विक शासन की वकालत जारी रखने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
प्रो. (डॉ.) वीना रामचंद्रन, संकाय सदस्य, मानविकी और सामाजिक विज्ञान विभाग ने भारत की राजनयिक यात्रा में एक मील का पत्थर के रूप में जी-20 की अध्यक्षता के महत्व पर जोर दिया और ग्लोबल साउथ को मजबूत बनाने में भारत के नेतृत्व और प्रमुख शक्तियों के साथ संबंधों को व्यवस्थित करना, दक्षिण एशियाई भू-राजनीति, सभ्यता विमर्श, छोटे राज्य की असुरक्षा दुविधा और बहुपक्षीय संस्थानों की भूमिका के विषय पर चर्चा की ।
जवाहर लाल यूनिर्वस्टी, दिल्ली के प्रोफसर डॉ. स्वर्ण सिंह ने विशेष रूप से भारत की “नई कल्पना“ पर जोर दिया, जिसमें उपनिवेश मुक्त करने के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया गया। उन्होंने यह तर्क भी दिया कि जी-20 के बाद के विचार-विमर्श न केवल सुरक्षा चिंताओं से प्रेरित हैं और विकास पर ध्यान केन्द्रीत करना है ।
प्रो. (डॉ.) श्रीराधा दत्ता, प्रोफेसर ओ.पी. जिन्दल ग्लोबल यूनिर्वस्टी, सोनीपत ने भारत की “नेबरहूड फर्स्ट“ नीति के बारे में बात की और इस बात पर जोर दिया कि भारत अपने पड़ोसियों को नहीं बदल सकता, लेकिन वह अपना दृष्टिकोण बदल सकता है तथा कहा कि छोटे राज्य अव्यवस्था, असुरक्षा, दुविधा और वितिय हानी से बचाव के मुद्दों पर चर्चा की ।