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सीएसआईआर-सीरी में पद्मभूषण डॉ. अमरजीत सिंह की कांस्‍य प्रतिमा का अनावरण

Updated on Thursday, November 21, 2024 18:20 PM IST

डॉ सिंह के परिवार की उपस्थिति में भावनात्मक समारोह में हुआ मूर्ति अनावरण

प्रसिद्ध मूर्तिकार मातुराम वर्मा द्वारा तैयार की गई है मूर्ति

पिलानी, 21 नवंबर, केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीरी) में पद्मभूषण डॉ. अमरजीत सिंह की 100वीं जयंती के अवसर पर उनकी कांस्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। प्रतिमा की स्‍थापना संस्‍थान परिसर के नेहरू उद्यान में की गई। इस अवसर पर संस्‍थान के निदेशक डॉ पी सी पंचारिया सहित पूर्व निदेशक प्रोफेसर चंद्रशेखर, स्‍व. डॉ सिंह के परिजन, संस्‍थान के वैज्ञानिक एवं अन्‍य कार्मिक, मूर्तिकार मातुराम वर्मा, पिलानी के गणमान्‍य जन एवं मीडियाकर्मी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम वैक्यूम इलेक्ट्रॉन डिवाइसेज पर आधारित वार्षिक राष्‍ट्रीय विज्ञान सम्‍मेलन वेदा-2024 के साथ आयोजित किया गया, जो डॉ. सिंह के अद्वितीय योगदान को समर्पित करते हुए इस वर्ष सीरी में आयोजित किया गया।

डॉ. सिंह के सबसे छोटे पुत्र, अरविंद सिंह ने परिवार की ओर से विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि यह प्रतिमा केवल एक श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उन अनगिनत जीवनों की याद दिलाती है जिन्हें हमारे पिता ने प्रेरित किया और जो आज भी प्रेरणा का स्रोत हैं।" उन्होंने "पद्मभूषण डॉ. अमरजीत सिंह यंग साइंटिस्ट अवार्ड" की स्थापना की घोषणा की, जो हर वर्ष वैक्यूम इलेक्ट्रॉन डिवाइसेज में उभरती प्रतिभाओं को सम्मानित करेगा और डॉ. सिंह की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएगा।

इस अवसर पर अपने भावपूर्ण संबोधन में सीरी के निदेशक, डॉ. पी सी पंचारिया ने स्‍व. डॉ. अमरजीत सिंह के संस्थागत योगदानों के प्रति आभार प्रकट किया और परिवार को इस कार्यक्रम को मूर्तरूप देने में उनके सहयोग के लिए आभार व्‍यक्‍त किया। संस्‍थान के पूर्व निदेशक एवं वरिष्‍ठ इमेंरिटस प्रोफेसर, बिट्स-पिलानी प्रोफेसर चंद्रशेखर ने डॉ. सिंह से जुड़े संस्‍मरण साझा किए और सीरी संस्‍थान सहित पिलानी के विकास के लिए किए गए प्रमुख कार्यों पर प्रकाश डाला।

उल्‍लेखनीय है कि डॉ. अमरजीत सिंह, सीरी के संस्थापक वैज्ञानिकों में से एक थे एवं संस्‍थान के प्रथम निदेशक थे जिन्‍होंने वैक्यूम इलेक्ट्रॉन डिवाइसेज अनुसंधान के क्षेत्र में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई। वे 1963 से 1984 तक सीरी के निदेशक रहे। इस अवसर पर वैज्ञानिक उपलब्धियों के साथ-साथ, उनके संवेदनशील और प्रेरणादायक नेतृत्‍व को भी याद किया गया, जिन्होंने सीरी को एक परिवार की तरह पोषित किया और वे संस्थान के कार्मिकों एवं उनके परिवारों से भी भावनात्‍मक रूप से जुड़े रहे।

इस भावपूर्ण समारोह में स्‍वर्गीय डॉ. सिंह के परिवार के सदस्य शामिल हुए, जिनमें उनकी 92 वर्षीय पत्नी, जिन्होंने अमेरिका से एक लंबी यात्रा की, और उनके तीनों पुत्र व उनकी पत्नियां उपस्थित थे। कार्यक्रम में सीरी लेडीज क्लब के प्रतिभाशाली कलाकारों द्वारा डॉ. सिंह के प्रिय भजनों को प्रस्‍तुत करते हुए भावनात्‍मक एवं आध्यात्मिक वातावरण बनाया।

इस अवसर पर कांस्य प्रतिमा परियोजना में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए डॉ मनीष मथ्‍यु, मूर्तिकार मातुराम वर्मा और संस्‍थान में सिविल अनुभाग के प्रभारी अशोक नायक को भी सम्‍मानित किया गया।

Readers' Comments
वी.पी. रोहिल, पूर्व निजी सचिव 11/23/2024 2:18:16 PM

पद्मभूषण डा. अमरजीत सिंह न सिर्फ संस्थान के प्रथम निदेशक थे बल्कि वे एक ऐसी सख्सियत थी जिनके कार्यकलापों से संस्थान में हुए शौध एवं विकास कार्यों की देश-विदेश में भरपूर सराहना हुई। वे मधुर भाषी रहे हैं, समाजकल्याण में सदैव अग्रसर रहे, कालोनी में निवासियों के हरेक कार्यक्रम में शामिल होते थे, यहाँ तक कि पिलानी के आस-पास के इलाकों में आयोजित कार्यक्रमों में अपनी उपस्थिति दर्ज किया करते थे। वे संत विनोबा भावे जी के अनुयायी रहे हैं। मुझे स्मरण हो रहा है कि डा. सिंह जी द्वारा मुझे विनोबा भावे जी के एक भाषण की कैसेट टेप रिकॉर्डर पर सुन कर हिंदी में टाईप करने का सौभाग्य प्रदान किया था । यह मेरे लिए बडे़ गौरव की बात थी। जिसे मैंने लक्ष्य मानकर पूर्ण कर उन्हें सौंप दिया था जिसे पाकर वे बहुत प्रसन्न हुए थे। ईश्वर करे सीरी को ऐसे निदेशक हमेशा प्राप्त होते रहे।

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