देहरादून - देश व प्रदेश के वाहन स्वामी अपने वाहनों का कर अब आन लाइन जमा कर सकेंगे। वाहन स्वामियों को वाहन कर जमा करने के लिए अनावश्यक रूप से परिवहन कार्यालय नही जाना होगा। परिवहन विभाग में ई-पेमेंट व्यवस्था का शुभारम्भ प्रदेश के परिवहन मंत्री सुरेन्द्र राकेश ने स्थानीय होटल में आयोजित एक कार्यक्रम में किया। अपने सम्बोधन में श्री राकेश ने कहा कि उत्तराखण्ड देश का 13वां राज्य होगा जहां के परिवहन विभाग में आनलाइन व्यवस्था प्रारम्भ कर दी गयी है। इस व्यवस्था के लागू होने से जहां प्रदेश के राजस्व में आशातीत वृद्वि होगी वहीं वाहन स्वामी एवं जनसाधारण को आरटीओ कार्यालय के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने होंगे साथ ही इससे उनके धन एवं समय की भी बचत होगी। उन्होने कहा कि इस व्यवस्था से प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। पर्यटन के विकास के साथ ही रोजगार के अवसर भी बढेगे।
इस व्यवस्था के चलते बाहर से आने वाले पर्यटक अपने वाहनों का टैक्स आनलाइन जमा कर सकेंगे। कर के आॅनलाइन होने से परिवहन सेवाएं और अधिक सुगम, त्वरित एवं जनपयोगी हो सकेंगी। इस व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश के परिवहन विभाग में नयी क्रान्ति का आगाज हुआ है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए उन्होने परिवहन महकमें के अलावा एनआईसी तथा भारतीय स्टेट बैंक को भी बधाई दी। उन्होने बताया कि भविष्य में स्मार्ट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण व्यवस्था को भी जल्द ही आनलाइन किया जायेगा। पर्वतीय क्षेत्रों में वाहन दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जीपीआरएस सिस्टम की भी व्यवस्था की जा रही है। उन्होने बताया कि परिवहन विभाग में लक्ष्य से अधिक राजस्व वसूल कर कीर्तिमान स्थापित किया है। इसी प्रकार परिवहन निगम की उपलब्धियों को गिनाते हुए उन्होने कहा कि बिना बस का किराया बढाये परिवहन निगम के 25 करोड़ रूपये के घाटे को कम किया गया है। वर्तमान में यह घाटा मात्र 12 करोड रूपये शेष रह गया है। परिवहन निगम की आय बढाने के लिए नयी बसों का बेडा भी शामिल किया जा रहा है। कार्यक्रम में सचिव परिवहन डा उमाकांत पंवार, अपर सचिव नितेश झा, उपमहानिदेशक एनआईसी डा. गौतम घोष, उप महाप्रबंधक भारतीय स्टेट बैंक भगवत सिंह, निदेशक एनआईसी, डा. बीआर शुक्ला के अलावा सम्भागीय परिवहन अधिकारी सनत कुमार सिंह, सुधाशुं गर्ग, सहायक परिवहन अधिकारी दिनेश चन्द्र पठोई, राजीव मेहरा, संदीप सैनी के अलावा बडी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ निदेशक एनआईसी डा.एसपी कुलश्रेष्ठ द्वारा किया गया।