नई दिल्ली। महंगाई के साथ ही डीज़ल के दामों में बढ़ोत्तरी होने पर आलोचनाओं का सामना कर रही यूपीए के इस कदम पर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा है कि सरकार डीज़ल के बढ़े हुए दामों को वापस नहीं लेगी। उन्होने कहा कि डीज़ल का सबसे ज्यादा उपभोग करने वाली रेलवे को भी अपने बजट से इसका इंतजाम करना होगा। अत: थोक खरीददारों को भी दामों में कोई छूट नहीं मिलेगी। मोइली ने कहा है कि हमें अपनी जरूरत का 83 फीसदी बाहर से आयात करना पड़ता है और कम दामों में इसे बेचने पर तेल कंपनियों को भारी घाटा होता है। इसलिए बढ़े हुए दाम वापस लिये जाने की कोई संभावना नहीं है। राजधानी दिल्ली में पचास पैसा दाम बढ़ने के साथ ही डीज़ल की कीमत 47.65 रूपये प्रति लीटर हो गयी है। हालांकि थोक में लेने वाले ग्राहकों को 56.88 रूपये प्रतिलीटर देना होगा। मोइली ने बढी कीमतों का बचाव करते हुए कहा है कि तेल कंपनियों को प्रति लीटर 9 रूपये नुकसान होता है। इसके पहले राजग सरकार ने भी तेल की कीमतों को नियंत्रण मुक्त किया था वहीं संप्रग सरकार ने तेल कंपनियों को सब्सिडी देना शुरू किया। यह पूछने पर की डीज़ल के बढ़े हुए दामों से महंगाई बढ़ेगी और गरीब जनता पर इसका असर पड़ेगा के जवाब में मोइली ने कहा कि हमने केरोसिन की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। उनका कहना है कि बढ़ी कीमतों का असर थोक खरीदारों पर पड़ेगा। सलाना 24.28 लाख टन डीजल का उपभोग करने वाले रेलवे को अब इसके लिए 2,727 करोड़ रूपये खर्च करने होंगे वहीं रक्षा क्षेत्र को 299 करोड़ रूपये अधिक खर्च करने होंगे। रक्षा क्षेत्र में प्रतिवर्ष 2.67 लाख टन डीजल की खपत होती है।