चंडीगढ़. मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने फसलों पर लगने वाले टैक्स को कम करने के संकेत दिए हैं। यही नहीं, प्राइवेट मंडियों को प्रोत्साहित करने के लिए मंडी एक्ट 1961 में भी संशोधन किया जा सकता है।
बादल ने ये संकेत पिछले दो दिनों से चल रही केंद्रीय कृषि विशेषज्ञों की टीम और प्रगतिशील किसानों के साथ चर्चा के बाद दिए।
उन्होंने प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री स्थापित करने पर बल दिया। प्रदेश में फसलों पर सबसे अधिक टैक्स (13.5 फीसदी) लगा हुआ है। इसका एग्रो इंडस्ट्री पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। मीटिंग में प्रगतिशील किसानों ने इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांट्रेक्ट फार्मिग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा। उन्होंने बासमती के निर्यात पर हटाए गए सैस के बदले कृषि मंत्रालय से प्रति वर्ष 100 करोड़ रुपए देने की मांग की। बाद में हाईपावर्ड केंद्रीय कमेटी के साथ बैठक में बादल ने फसल विविधता के लिए केंद्र सरकार से मदद मांगी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में राज्य सरकार 30 अप्रैल तक कृषि मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपेगी।
बादल ने कहा कि वैकल्पिक फसलों की योजना तैयार कर ली गई है। उन्होंने कहा कि इन फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी पर हाईब्रिड बीज और मशीनरी के लिए वित्तीय सहायता भी दी जाएगी। उन्होंने मकई का समर्थन मूल्य तय करने पर भी बल दिया। फूड प्रोसेसिंग मंत्रालय के संयुक्त सचिव अनुराधा प्रसाद ने सीमांत क्षेत्र में नेशनल इंटरप्रिन्योरशिप एंड मैनेजमेंट की स्थापना के लिए राज्य सरकार को विस्तृत योजना भेजने को कहा ताकि युवाओं को प्रशिक्षण मुहैया करवाया जा सके।