चण्डीगढ़, 5 अप्रैल : पंजाब के मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल ने आज पंजाब राज्य किसान आयोग के चेयरमैन डा.जी एस कालकट को कृषि के कार्य में सौर ऊर्जा क ा प्रयोग करने के लिए ढंग तरीके ढूंढने के लिए कहा जिससे बिजली की निर्विघ्र आपूर्ति विश्वनीय बनाने के साथ साथ बिजली की बजच करके किसानों को लाभ देने का दोैहरा उद्धेश्य पूरा होगा।
आज यहां मुख्य मंत्री निवास पर डा. कालकट के नेतृत्व मे कृषि नीति तैयार करने के लिए गठित कमेटी द्वारा पेश की नीति के प्रारूप को जारी करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि कृषि, बागवानी और फूलों की काश्त के लिए सौर ऊर्जा का बेहतर प्रयोग राज्य में अहम सिद्ध हो सकता है। क्योंकि यह न के वल सस्ती है बल्कि वातावरण पक्षीय भी है। उन्होंने कहा कि यह समय की जरूरत है कि कृषि के कार्यों में ऊर्जा के रिन्यूएबल स्रोतों के प्रयोग को उत्साहित करने के लिए किसानों को जागरूक किया जाए। स. बादल ने कहा कि केन्द्र सरकार पहले ही किसानों को कृषि के लिए सौर ऊर्जा अपनाने हेतू उत्साहित करने के लिए सबसिडी की सुविधा उपलब्ध करवा चुकी है और राज्य सरकार द्वारा भी अपने स्तर पर सबसिडी दी गई है।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सौर ऊर्जा का प्रयोग न केवल बिजली की खप्त घटाने में सहायक होगी बल्कि किसानों के लिए भी बिजली की आपूर्ति विश्वसनीय बनाने का लाभ होगा। उन्होंने कृषि विभाग को कहा कि कृषि क्षेत्र में विशेषकर ऊर्जा के गैर रिवायती स्रोतों को बड़े स्तर पर उत्साहित किया जाये ताकि राज्य में बिजली की कमी समाप्त की जा सकें।
कृषि क्षेत्र में ओर सुधारों द्वारा किसानों की आय में बढ़ौतरी करने की जरूरत पर बल देते हुए मुख्य मंत्री ने कहा कि मौजूदा दौर में कृषि विविधता को उत्साहित करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किये जाने चाहिए। मौजूदा कृषि संकट में से किसानों को निकालने के लिए राज्य सरकार की वचनबद्धता को दौहराते हुए स. बादल ने कहा कि इसके लिए किसानों की आय बढ़ाने हेतू डेयरी फार्मिंग, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, बकरी पालन, सूअर पालन और अन्य सहायक धंधे को अपनाए जाने पर बल दिया जाना चाहिए। स. बादल ने कहा कि इन सहायक धंधों के विकास के लिए एक व्यापक योजना में निम्र स्तर तक किसानों की सक्रिय हिस्सेदारी बनाई जाये।
मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिये कि देश में कृषि विविधता के उद्धेश्य के लिए केन्द्र सरकार द्वारा बनाए मंत्री समूह को अन्तिम प्रस्ताव सौंपने से पूर्व विकासशील किसानों एवं उनकी सम्बन्धित संस्थानों से विस्तार में जाकर विचारविमर्श किया जाये।उन्होंने कहा कि मंत्री समूह को की जाने वाली सिफारिशें किसानों के लम्बे समय के हितों को ध्यान में रखकर की जायें। ताकि वह इसका पूरा फायदा उठा सकें। स. बादल ने अधिकारियों को यह निर्देश दिये कि वह अपनी सिफारिशें शीघ्र अति शीघ्र व्यापक ढंग से देंने को विश्वसनीय बनाएं ताकि केन्द्र सरकार द्वारा समय पर कदम उठाए जा सकें।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कहा कि राज्य के सोयाबीन एवं दालों के मण्डीकरण को यकीनी बनाने के लिए सम्पूर्ण मार्किट सिस्टम अमल में लाने क ी संभावनाए तलाशी जाएं ताकि किसानों को इसकी पैदावार के लिए उत्साहित किया जाये। जिससे किसानों को गेहूं-धान के फसलीचक्र में से बाहर निकालने के लिए मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि इन फसलों की काश्त से न केवल किसानों को बड़ा लाभ होगा बल्कि मूल्यवान प्राकृतिक स्रोतों को बचाने के लिए भी अहम सिद्ध होगा। स. बादल ने कहा कि कृषि विभाग द्वारा राज्य कीमत एवं मूल्य आयोग का गठन करने के साथ साथ इन फसलों के लिए भी किसानों को राज्य का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने के सम्बन्धी भी विचार किया जाना चाहिए।
राज्य में कीट नाश्कों की ऊंची कीमतों पर चिन्ता व्यक्त करते हुए मुख्य मंत्री ने कृषि विभाग को कहा कि किसानों को वाजिब कीमतों पर गुणात्मक केैमिकल मुहैया करवाने को यकीनी बनाने के लिए हर सम्भव प्रयास किये जाएं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना तहत मिलती सबसिडी क े अतिरिक्त कृषि विभाग द्वारा भी इन कीट नाशकों की खरीद कम्पनियों के पास बड़े स्तर पर प्राप्त करके किसानों को सस्ते रेटों पर मुहैया करवानी चाहिए। स. बादल ने कहा कि अधिकारियों द्वारा राज्य के फसली ढंग का विस्तृत अध्ययन किया जाये ताकि क्षेत्र अनुसार गेहूं एवं धान की परिवर्तित फसलों पर बल दिया जा सकें।
मुख्यमंत्री ने किसानों की सुविधा के लिए अति आधुनिक औजार मुहैया करवाने के लिए ब्लॉक स्तर पर कृषि सेवा केन्द्र स्थापित करने के लिए कहा।