चण्डीगढ़, 3 अप्रैल : राज्य में दिनप्रतिदिन जाति आधारित भेदभाव और शैक्षणिक संस्थानों में जाति और दलित शब्दों के प्रयोग की मिल रही रिपोर्टों का गम्भीर नोटिस लेते हुए पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग ने निर्देश जारी किये हैं कि अनुसूचित जाति के लिए दलित शब्द का प्रयोग न किया जाये और विशेष शैक्षणिक संस्थानों में जाति सूचक शब्दों के प्रयोग रोकने की जिम्मेवारी सम्बन्धित संस्थान के मुखी की होगी।
इस सम्बन्धी ओर जानकारी देते हुए आयोग के सदस्य स. दलीप सिंह पांधी ने बताया कि चाहे संविधान के निर्माताओं ने देश में से जाति प्रथा के कोड़ को समाप्त करने के लिए संविधान में मदें शामिल की हैं परन्तु दु:खी की बात है कि 6 दशक बीत जाने के बाद भी जागीरू बिरती की मानसिकता में ग्रस्त समाज के कुछ वर्ग द्वारा ऐसे भी अनुसूचित जाति से सम्बन्धित लोगों से भेदभाव भरा व्यवहार किया जाता है। उन्होंने कहा कि यदि आयोग के ध्यान में ऐसा मामला सामने आता है तो सम्बन्धितों विरूद्ध कठोर कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति के लिए दलित शब्द के प्रयोग से गुरेज किया जाये।