नई दिल्ली/चंडीगढ़ - मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने पंजाब वासियों को अमन-शांति और तरक्ख्की के लिये कार्य करने का आह्वान करते हुये पूर्व डी जी पी के पी एस गिल के गुणों की सराहना की। उन्होंने कहा कि खुशहाल और शांतमयी पंजाब की स्थापना ही इस महान व्यक्ख्ति को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी। एक कुशल अधिकारी के तौर पर गिल के योगदान को याद करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व डीजीपी के निधन से उन्होंने निजी तौर पर अपना एक दोस्त खो दिया है।
श्री गिल जोकि 82 वर्ष की आयु में 26 मई को चल बसे, की अंतिम अरदास के अवसर पर मुख्यमंत्री ने बिछुड़ी आत्मा और उन लोगों के लिये प्रार्थना की जिन्होंने पंजाब की शांति के लिये अपनी जानें कुर्बान कर दी। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि देश ने एक महान व्यक्ख्तित्व को खो दिया है जिन्होंने पंजाब और देश में अमन शांति कायम करने के लिये अपना योगदान डाला जिस स्वरूप आंतकवाद मुक्ख्त वातावरण में तरक्ख्की एवं विकास हो सका है।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि कई पीढिय़ों में ऐसा घटित होता है जिसमें एक व्यक्ख्ति श्री गिल की तरह अपनी छाप छोड़ कर जाता है। उन्होंने कहा कि 1962 की जंग पर अपनी पुस्तक के लिये पहली बार वह श्री गिल को मिले थे। श्री गिल उस समय तेजपुर के एसपी थे और चीनी फौज की सैक्टर में घुसपैठ को मुंह तोड़ जवाब देने के लिये पूरी तरह दृढ थे। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने आगे कहा कि श्री गिल जानते थे कि जो भी खतरा हो, उससे आगे होकर कैसे सामना करना है।
पंजाब में आंतकवाद से लड़ाई में श्री गिल के योगदान को स्मरण करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि उस काले दौर के दौरान 35000 से अधिक लोग मारे गये थे और जिन लोगों ने वह काला दौर नही झेला, वह श्री गिल के योगदान को कभी भी समझ नही सकते। कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि जब श्री गिल ने पंजाब पुलिस का चार्ज संभाला था तो उस समय पंजाब पुलिस का मनोबल काफी कमजोर था जो आंतकवादियों के खौफ के कारण सूर्य छिपने के बाद पुलिस थानों के गेट बंद कर लेती थी। उन्होंने कहा कि पंजाब को उस समय मज़बूत नेतृत्व की जरूरत थी जिस पर गिल खरे उतरे।
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि ‘मुझे वह समय याद है जब मैं गुरदासपुर से रवि इंद्र सिंह के साथ सफर करते हुये डी सी को मिलने के लिये रूका। उन्होंने दरवाजा नही खोला और हमने उससे फोन पर बात की जो फोन उसको बंद दरवाजे द्वारा सौंपा गया था। डी सी ने कहा कि वह अंधेरा होने के बाद किसी को नही मिलता। मुख्यमंत्री ने उन खौफनाक दिन एवं रातों को याद किया जब श्री गिल निर्भय होकर दिश दर्शक की तरह सक्रिय थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री गिल ने लोगों का भरोसा बहाल करने के लिये रात्रि गलियारा ऑपरेशन आरंभ किया जिससे हालात बदलने आरंभ हुये। उन्होंने कहा कि पूर्व डी जी पी की शक्ख्तिशाली कार्रवाई ने पुलिस का मनोबल बढ़ाया और पुलिस को आंतकवाद विरूद्ध जंग लडऩे एवं जीतने के योग्य बनाया। पंजाब के डी जी पी सुरेश अरोड़ा ने कहा कि आंतकवाद के दिनों के दौरान जिस प्रकार श्री गिल ने पुलिस फोर्स का नेतृत्व किया। इसने उनको मेरी नजरों में मसीहा बना दिया।
उन्होंने श्री गिल से पहले मुलाकात को याद करते हुये कहा कि वह स्वयं उस समय ए एस पी थे जबकि श्री गिल आई जी थे। श्री अरोड़ा ने कहा कि जिस मज़बूती से श्री गिल पंजाब पुलिस से जुड़े हुये थे वह कभी भी पूरी तरह सेवा निवृत नही हुये। डी जी पी ने कहा कि मैं उनकी सेवा निवृति के बाद भी उनके साथ आम तौर पर सलाहमशवरा करता रहता था। श्री अरोड़ा ने कहा कि पंजाब में अमन-शांति और सुख शांति को कायम करके श्री गिल की उम्मीदों को सदा जीवित रखना ही उनको सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अमृतसर से भाजपा की पूर्व विधायक लक्ष्मीकांता चावला ने श्री गिल को आंतकवाद का सफाया करने वाला पंजाब का रखवाला बताते हुये कहा कि उनके कार्य को उन लोगों ने बहुत मान्यता दी है जो आंतकवाद से पीडि़त थे और अपने राज्य और अमन शांति को प्रेम करते थे।