मॉस्को - रूस ने दुनिया का सबसे पहला और अनोखा परमाणु संयंत्र तैयार किया है। इस संयंत्र की खासियत है कि यह पानी में तैरता है और इसे जरूरत के मुताबिक कहीं भी ले जाया जा सकेगा। वहीं भारत, चीन, इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेन्टीना समेत 15 देशों ने ऐसे पॉवर स्टेशनों को खरीदने की इच्छा जताई है।
इस तैरते परमाणु संयंत्र से बिजली के संकट वाले इलाकों में विद्युत आपूर्ति हो सकेगी और यह बंजर क्षेत्रों में शुद्ध पानी भी पहुंचाएगा। यह संयंत्र सितंबर 2016 से बिजली उत्पादन भी शुरू कर देगा। रूस के उप प्रधानमंत्री दमित्री रोगोजिन ने ताजा जानकारी देते हुए कहा कि रूस के सबसे बड़े जहाज निर्माता 'द बाल्टिक प्लांट' के हाथों में संयंत्र को पूरा करने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि 'द एकेदमिक लोमोनोसोव' नाम के इन परमाणु संयंत्रों की जल्द ही पूरी श्रृंखला तैयार की जाएगी।
इस संयंत्र से उद्योगों, बंदरगाह शहरों, तेल उत्खनन प्लेटफॉर्मों को बिजली मिलेगी इन तैरते परमाणु संयंत्रों से बड़े औद्योगिक कारखानों, बंदरगाह शहरों, सुदूर क्षेत्र के गैस एवं तेल उत्खनन प्लेटफार्मों को ऊर्जा आपूर्ति होगी। इसे बर्फ के पहाड़ों को तोड़ने वाले और छोटे परमाणु संयंत्रों से बने आइसब्रेकर शिप की तर्ज पर तैयार किया गया है। आइसब्रेकर शिप पिछले 50 वर्षों से आर्कटिक क्षेत्र में अभियान में जुटे हैं। संयंत्र में खारे पानी को शुद्ध करने वाले एक प्लांट भी होगा।