मोहाली - मोहाली क्षेत्र से अकाली दल प्रभारी रहे बलवंत सिंह रामूवालिया के उत्तर प्रदेश में मंत्री बनने के बाद यहां की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है। रामूवालिया के इस फैसले का सीधा असर उनकी बेटी के राजनीतिक करियर पर होगा। पिता के फैसले से बेटी के लिए मुश्किलें बढऩा तय हो गया है। पिछले कई दिनों से बिखराव की तरफ बढ़ रहे पंजाब के सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल को उस समय बड़ा झटका लगा जब अकाली दल की पहली कतार में शामिल रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री बलवंत सिंह रामूवालिया अभूतपूर्व घटनाक्रम को अंजाम देते हुए उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी सरकार में मंत्री बन गए।
अखिलेश सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री के पद की शपथ दिलाई गई। पंजाब के अधिकतर लोगों और अकाली दल नेताओं को आज इस बारे में टीवी चैनलों के माध्यम से ही पता चला। पूर्व समय के दौरान रामूवालिया लोक भलाई पार्टी के नाम से राजनीतिक पार्टी का गठन किया और विदेशी दूल्हों की जालसाजी का शिकार सैकड़ों लड़कियों का पुनर्वास करवाया। रामूवालिया लंबे समय तक विदेशों में फंसी लड़कियों की लड़ाई लड़ते रहे हैं।
करीब छह साल पहले रामूवालिया ने अपनी पार्टी का अकाली दल में विलय किया और अकाली दल ने पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें मोहाली से पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़वाया लेकिन रामूवालिया चुनाव हार गए। चुनाव हारने के बावजूद अकाली दल में रामूवालिया की गिनती पहली कतार के नेताओं में होती रही है। जिसके चलते उन्हें मोहाली का प्रभारी तथा उनके दामाद एवं पंजाबी लोक कलाकार हरभजन मान को मोहाली योजना बोर्ड का अध्यक्ष बना दिया गया।
माना जा रहा है पंजाब सरकार बहुत जल्द रामूवालिया की बेटी को योजना बोर्ड अध्यक्ष पद से हटा सकती है या फिर उनसे इस्तीफा मांगा जा सकता है।