चण्डीगढ़, 18 मार्च : पंजाब के शिक्षा एवं भाषा मंत्री स. सिकन्दर सिंह मलूका ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षाओं में पंजाबी सहित भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं का रूतबा घटाने के किये जा रहे केन्द्र सरकार के प्रयासों की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधनों अनुसार अंग्रेजी भाषा में प्राप्त किये जाने वाले अंक मैरिट सूची में शामिल कि ये जाएंगें। जबकि पहले अंग्रेजी भाषा में से पास होना ही काफी था। उन्होंने कहा कि चाहे हाल के समय इस पर रोक लगा दी है। परन्तु यह प्रस्ताव पूरी तरह रद्द किया जाना चाहिए।
स. मलूका ने कहा कि यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो पंजाबी सहित अन्य भारतीय भाषाओं के माध्यम में परीक्षा केवल तो ही दी जा सकेगी यदि इन भाषाओं के न्यूनतम 25 उम्मीदवार परीक्षा देने वाले होंगें। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रस्ताव लागू होने से केवल वह उम्मीदवार ही भारतीय भाषाओं में परीक्षा दे सकेंगें। जिन्होंने वह भाषा मुख्य विषय के तौर पर स्नातक स्तर तक पढ़ी होगी। स. मलूका ने कहा कि स्वतंत्रता के हमारे 6 दशक बीत जाने के बाद भी भारतीय भाषाओं की जगह अंग्रेजी को महत्व दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रशासक की आवश्यकता किसी विशेष क्षेत्र में कार्य करने के लिए उस भाषा में होनी जरूरी है नाकि अंग्रेजी में। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लिया जा रहा यह फैसला पूरी तरह गलत और जन विरोधी है जोकि भारतीय भाषायी भिन्नता को क्षति पहुंचाने वाला है उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों से अपने देश की क्षेत्रीय भाषाओं और सांस्कृतियों को प्रौत्साहन नही कर सकते जोकि वर्तमान समय की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसलों से केवल भाषायी विभिन्नता का ही नही बल्कि संस्कृतिक विभिन्नता को भी नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि यदि प्रस्ताव अमल में आता है तो इससे गरीब और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा देने वाले विद्यार्थी प्रतियोगिता में से बाहर हो जांएगे जो इन विद्यार्थीयों से घोर अन्याय होगा। उन्होंने कहा कि इस वर्ग को समाज में और प्रशासकीय सेवाओं में अपनी बनती जगह मिलनी चाहिए तभी समान विकास कर सकते हैं।
उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव को अनिवार्य तौर पर रद्द किया जाना चाहिए ताकि क्षेत्रीय भाषाओं और संस्कृतियों को बढ़ावा मिले और क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा हासिल करने वाले उम्मीदवारों को न्याय मिल सके।