स्टॉकहोम - स्वीडन दुनिया का पहला कैशलेस देश बनने जा रहा है। स्वीडन में अब छोटी से छोटी खरीदारी के लिए बैंक कार्ड बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहे हैं। वर्तमान में सिर्फ 80 बिलियन स्विडिश क्राउन लेने-देन में चलन में हैं। जो 6 साल पहले करीब 106 बिलियन था। 6 सालों में क्राउन के इस्तेमाल में भारी गिरावट आई है। बाकी पैसा या तो लोगों के घरों में है या बैंक में जमा है या गैरकानूनी तरीके से इस्तेमाल हो रहा है। अधययन के मुताबिक स्वीडन के कैशलेस देश बनने का श्रेय देश द्वारा सूचना तकनीक को अपनाने को जाता है।
देश में संगठित अपराध एवं आतंक पर भी काबू किया गया है, जिस कारण लोग अब बेखौफ होकर डिजिटल पेमेंट सिस्टम को अपना रहे हैं। देस में बड़े स्विडिश और डैनिश बैंकों के बीच आपसी सहयोग के परिणामस्वरूप स्विट्जरलैंड में एक डायरेक्ट पेमेंट ऐप बैंकगिरो डेवलप किया गया है। जिसके इस्तेमाल से लोग आपस में ट्रांजैक्शन करते हैं। बैंकगिरो और स्वीडन के राष्ट्रीय बैंक रिक्सबैंकन से सर्विस सेक्टर के सीधे तौर पर संपर्क के कारण ऐसा संभव हो पाया है। स्विडिश बैंकों ने बहुत पहले अडवांस आईटी सिस्टम को अपनाया है। इसके अलावा डिजिटल पेमेंट सरल है और इस पर खर्च भी बहुत ही कम आता है जिस कारण यह देश के पेमेंट सिस्टम में पारदर्शिता को सुनिश्चित करती है। स्वीडन में कई बैंक ऐसे हैं जिनकी शाखाएं 100 फीसदी डिजिटल हैं और कैश नहीं लेती हैं।