चंडीगढ़ - देश में मुसलमानों पर बार-बार हो रहे अत्याचार और बढ़ती असहनशीलता के विरोध में जानी-मानी पंजाबी लेखिका और पद्मश्री से सम्मानित दलीप कौर तिवाना ने अपना अवार्ड लौटा दिया। वह इस पूरे प्रसंग में पद्मश्री लौटाने वाली पहली साहित्यकार हैं। अपना साहित्य अकादमी अवार्ड लौटा रहे लेखकों की कड़ी में मंगलवार को एक और कन्नड़ लेखक शामिल हो गए।
इसी से जुड़े एक घटनाक्रम में बुकर अवार्ड से सम्मानित सलमान रश्दी ने ‘मोदी टोडीज’ द्वारा की जा रही निंदा को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उन्होंने किसी राजनीतिक दल का समर्थन नहीं किया, बल्कि वह आपराधिक हिंसा के खिलाफ हैं। साल 2004 में पद्मश्री सम्मान पाने वाली तिवाना ने यह भी कहा कि सच्चाई और इनसाफ के पक्ष में खड़े होने वाले लोगों की हत्या करना हमें दुनिया और ईश्वर की आंखों में लज्जा का पात्र बनाता है। लिहाजा, मैं विरोध में पद्मश्री अवार्ड लौटाती हूं।
बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने अवार्ड लौटा रहे लेखकों की फेहरिस्त में शामिल होते हुए कन्नड़ लेखक प्रोफेसर रहमत तारीकेरी ने कहा कि विद्वान एमएम कलबुर्गी और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई लडऩे वाले नरेंद्र दाभोलकर एवं गोविंद पानसरे की हत्या के विरोध में वह अपना साहित्य अकादमी अवार्ड लौटा रहे हैं। कृष्णा सोबती और अरुण जोशी के भी अवार्ड लौटाने के फैसले के बाद नयनतारा सहगल और अशोक वाजपेयी सहित कम से कम 25 लेखक अपने अकादमी अवार्ड लौटा चुके हैं और पांच लेखकों ने साहित्य अकादमी में अपने आधिकारिक पदों से इस्तीफा दे दिया है।
साहित्य अकादमी ने इन घटनाक्रमों पर चर्चा के लिए 23 अक्तूबर को आपात बैठक बुलाई। सम्मान लौटाने वालों में हिमाचली भीदेश में बढ़ती सांप्रदायिकता और अभिव्यक्ति की आजादी पर मंडराते खतरे के बीच पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों में हिमाचल प्रदेश के हिंदी कथाकार राजकुमार राकेश भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने ‘गुलेरी साहित्य सम्मान’ लौटा दिया। अब तक 25 से अधिक लेखक साहित्य अकादमी सम्मान लौटा चुके हैं। देश के इतिहास में यह पहली घटना है, जब इतनी बड़ी संख्या में लेखकों ने पुरस्कार लौटाए हैं।