चंडीगढ,10 मार्च: अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भारत क्षेत्र की राष्ट्रमंडल महिला संसद सदस्यों और विधायकों के दो दिवसीय सेमीनार दौरान पंजाब के मुख्य संसदीय सचिव डा. नवजोत कौर सिद्धू द्वारा महिला सशक्तिकरण के हक में दिये इनकलाबी विचारों ने सबका ध्यान खीचा लोक सभी स्पीकर श्रीमती मीरा कुमार की अध्यक्षता अधीन 8 और 9 मार्च को करवाए सेमीनार दौरान डा सिद्धू द्वारा महिलाओं को आगे बढाने के लिए दिये गये सुझावों को सबने स्वीकार करते हुये इसकी हिमायत की।
डा. सिद्धू ने अपने संबोधन में महिलाओं क ो प्रत्येक क्षेत्र में 50 प्रतिशत आरक्षण का मामला उठाया। उन्होने कहा कि सरकार बनाने में महिलाओं को 50 प्रतिशत हक देने के अतिरिक्त केन्द्रीय और राज्य सरकारों के प्रत्येक विभाग चाहे वह सुरक्षा बल हो , में बराबर हिस्सा दिया जाए। उन्होने पंजाब विधान सभा चुनावों का उदाहरण देते हुये कहा कि कुल 985 पुरूष उम्मीदवारों में से 102 ने जीत हासिल की जबकि कुल 94 महिला उम्मीदवारो में से 15 महिलाओं ने जीत प्राप्त की इससे साबित होता है कि राजनीति में महिलाओं के हक में अधिक फतबा मिला है।
उन्होने यह प्रश्र भी उठाया कि महिलाओं को रक्षा , गृह और वित मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण पदों के काबिल क्यों नही समझा जाता उन्होने कहा कि यह निर्णय पक्के तौर पर करना चाहिए कि बलात्कार,छेडछाड और महिलाओं के सथ भेदभाव के मामलों की जांच महिला अधिकारी द्वारा ही की जाए उन्होने कहा कि उक्त मामलों के स्थाई हल करने तक ऐसे मामलो ंसंबधी राष्ट्रीय स्तर की सामाजिक संस्था कायम करनी चाहिए।
डाक्टरी पेशे से राजनीति में आई डा. सिद्धू ने कहा कि मादा भ्रूण हत्या के हल के लिए अधिक से अधिक स्टिंग आपरेशन करने चाहिए।सेमीनार दौरान पंजाब की मुख्य संसदीय सचिव ने सैंसर बोर्ड के मौजूदा ढांचे को पूरी तरह बदलने की बात की। उन्होने कहा कि फिल्मों में महिलाओं को महज दिखावे और शौहरत के लिए प्रयोग किया जाता है। उन्होने कहा कि नंगेजवाद को प्रोत्साहन देने वाले निर्माताओं , लेखकों ,अदाकारों और गायकों से कोई आशा नही रखी जा सकती उन्होने कहा कि ऐसे असुरक्षित माहोल में तो महिलाओं के लिए अलग स्कूल,कालेज, खेल मैदान, पार्क ,बसों, रेलगाडियों और जहाजों का प्रंबध करना पडेगा।
महिलाओं को अनिवार्य शिक्षा देने की मांग करते हुये डाक्टर सिद्धू ने ऐसे माता पिता को सजा देने की मांग भी रखी जो अपनी बच्चियों को शिक्षा देने के हक में नही है। उन्होने कहा कि देश के समूह स्कूलों में सामाजिक कदरों कीमतों के बारे में एक घंटा पढाई करवाई जाए।
उन्होने बलात्कार, छेडछाड,दहेज जैसे अपराधिक मामलों में पीडित महिलाओं के लिए पुर्नावास के न्द्र खोलने की मांग भी रखी उन्होने अपने क्षेत्र में महिलाओं के लिए चलाए जा रहे प्रोजैक्ट हिम्मत का उदाहरण देते हुये कहा कि महिलाओं संबधी मामलों के लिए ऐसा सिस्टम होना चाहिए कि पीडित महिला फोन या एस एम एस द्वारा शीघ्र अपने क्षेत्र की किसी भी महिला पुलिस अधिकारी या महिला राजनीतिक नेता या समाज सेवी महिला को जानकारी दे सके।