मोहाली - पहले की तरह अब भी मोहाली की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान यहां चल रहे उद्योगों के कारण ही होगी। जमीन देकर हवाई अड्डा बनवाने के बावजूद इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उदघाटन समारोह में शामिल होने के लिए मोहाली के किसी भी जनप्रतिनिधि को न्यौता नहीं मिला। मोहाली क्षेत्र के सांसद की ही इस कार्यक्रम में एंट्री हो सकी। गेटवे ऑफ पंजाब के नाम से प्रसिद्ध मोहाली एक बार फिर से अंतरराष्ट्रीय पहचान से वंचित रह गया है।
चंडीगढ़ हवाई अड्डे का विस्तार करते हुए एयरपोर्ट अथारिटी ऑफ इंडिया ने मोहाली के गांव झिउरहेड़ी की करीब 300 एकड़ जमीन पर 939 करोड़ रुपए की लागत से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का निर्माण किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे के दौरान समूची सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा मोहाली अथवा पंजाब के पास था। इसके बावजूद हवाई अड्डे के उद्घाटन समारोह में केवल मोहाली क्षेत्र के सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा को ही एंट्री मिल सकी।
अन्य किसी भी जनप्रतिनिधि को इस कार्यक्रम का न्यौता नहीं मिला। जिसे लेकर यहां के प्रतिनिधियों में रोष पाया जा रहा है। मोहाली जिला ने इस हवाई अड्डे के लिए जमीन दी है। इसके बावजूद इस हवाई अड्डे का नाम मोहाली के नाम पर नहीं रखा गया है। पंजाब सरकार इसे शहीद भगत सिंह इंटरनेशनल एयरपोर्ट मोहाली रखना चाहता था।