मोहाली - आखिर पूरे 6 महीने की कशमकश के बाद नगर निगम मोहाली के मेयर का ताज कुलवंत सिंह के सिर सज ही गया। इस चुनाव में दिलचस्प बात ये रही कि अकाली-भाजपा पूरा जोर लगाने के बावजूद भी अपना बहुमत साबित नहीं कर सका और बहुमत साबित न होने पर आज मेयर के चुनाव वाले दिन अकाली-भाजपा को इतनी फजीहत हुई कि वे सभी कौंसलर चुनाव प्रक्रिया में शामिल ही नहीं हुए। वहीं दूसरी ओर नगर निगम मेयर के इस चुनाव में शिरोमणि अकाली दल के हलका इंचार्ज बलवंत सिंह रामूवालिया को भी करारा झटका लगा है।
बाद दोपहर 3 बजे नगर निगम भवन के मीटिंग हाल में डिविजनल कमिश्नर डा. एस. करुणाराजू, कमिश्नर नगर निगम ऊमा शंकर गुप्ता तथा एसडीएम मोहाली लखमीर सिंह की देखरेख में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर तथा डिप्टी मेयर पद के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई। भले ही चुनाव के लिए निगम की ओर सभी पार्षदों को पत्र भेज कर आमंत्रित किया गया था लेकिन अकाली-भाजपा गठबंधन से संबंधित सभी कौंसलर इस चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं हुए। जबकि कुलवंत सिंह के अजाद ग्रुप तथा कांग्रेस गठबंधन के सभी 26 कौंसलर तथा एमएलए बलबीर सिंह सिद्धू चुनाव प्रक्रिया में शामिल हुए।
चुनाव प्रक्रिया में भले ही पहले मीडिया को शामिल होने की अनुमति नहीं थी लेकिन करीब एक घंटे के समय में चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद मीडिया को मीटिंग हाल में दाखिल होने की अनुमति दे दी गयी। इस उपरांत अजाद ग्रुप तथा कांग्रेसी गठबंधन से संबंधित सभी कौंसलरों ने गुरुद्वारा सिंघ शहीदां जाकर माथा भी टेका । नगर निगम के कुल 50 वार्डों के लिए चुनाव हुआ था, जिन में से एक महिला कौंसलर की चुनाव के बाद मौत हो गयी थी। इस प्रकार कुल 49 कौंसलरों द्वारा अपना मेयर बनाया जाना था।
अकाली-भाजपा गठबंधन कड़ी मशक्कत, लालच, दबाव की राजनीति चलाने के बावजूद भी अपना बहुमत साबित नहीं कर सका। विधायक सिद्धू ने कहा कि यह चुनाव 18 अगस्त को ही मुकम्मल हो जाता अगर अकाली-भाजपा गठबंधन की ओर से मीटिंग का बहिष्कार न किया जाता। इस बाद कौंसलर कुलजीत सिंह बेदी ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में जाकर निष्पक्ष चुनाव करवाये जाने की मांग रखी।