लुधियाना - जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने पंजाब के 110 ब्लॉकों में जल स्तर बहुत ज्यादा कम हो जाने और शेष राज्य में जल स्तर गिर जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए उसे खतरे की घंटी कहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब जैसे कृषि प्रधान राज्य में जल स्तर निरंतर गिरने के समाचारों पर हैरानी होती है। वह आज यहां पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के जल उपभोक्ता समितियों के अध्यक्षों के दो दिवसीय संयुक्त सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रही थीं। पंजाब में कुल 137 ब्लॉक हैं। उन्होंने कहा कि पानी को बचाने और उसके सदुपयोग के लिए देश में जल क्रांति लानी होगी। उन्होंने कहा कि क्रांति का अर्थ है पानी बचाने के लिए और कार्य करना।
सुश्री उमा भारती ने कहा कि देश में वर्षा भी पर्याप्त होती है, पहाड़ों से नदियों में पानी भी आता है लेकिन हमें व्यर्थ में नष्ट हो रहे जल का भंडार करके उसको सिंचाई के लिए प्रयोग करने का ढंग सीखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि कम पानी से ज्यादा से ज्यादा सिंचाई करने का कार्य भारत में भी होता है। उन्होंने कहा कि ऐसी जानकारी उनको राजस्थान के जेसलमेर और लोपडय़िा क्षेत्र में जाकर देखने से मिली और उन्होंने किसानों से कहा कि इस्राइल की तर्जपर कम पानी से सिंचाई सीखने की जरूरत है। उनके मंत्रालय ने इस हेतु प्रयास शुरू कर दिये हैं। केंद्रीय जल संसाधन मंत्री ने कहा कि नदियों की सफाई के लिए हमें केवल सरकार पर ही निर्भर नहीं रहना चाहिए बल्कि समाज को उसमें भागीदार बनकर अपना योगदान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि नदियों में कुछ फेंक कर नहीं बल्कि उसको साफ रखने से मोक्ष प्राप्त होता है। पंजाब के सिंचाई मंत्री शरणजीत सिंह ने ढिल्लों ने कहा कि हिमाचल प्रदेश से आते बरसाती पानी से पंजाब के कंडी क्षेत्र जिसमें रोपड़, गुरदासपुर और पठानकोट जिले शामिल हैं, की फसलों को बहुत क्षति पहुंचती है। लुधियाना, पटियाला, जालंधर और संगरूर को भी इससे नुकसान होता है। उन्होंने कहा कि यदि पंजाब की जल समस्या को तुरंत दूर न किया गया। तो इसका राजस्थान पर भी प्रभाव पड़ेगा।