चंडीगढ़, 4 मार्च: पंजाब के स्वास्थय मंत्री मदनमोहन मित्तल ने आज यहां बताया कि राज्य में 1,000 बच्चों के जन्म के बाद बाल मृत्यु दर (आई एम आर) 30 है जबकि राष्ट्रीय बाल मृत्यु दर (एन एम आर) 1000 के पीछे 44 है। इसी प्रकार एक लाख स्वास्थय बच्चों के जन्म के बाद जननी मृत्यु दर, राष्ट्रीय दर 212 के मुकाबले पंजाब में 172 है।
यहां जारी बयान में उन्होंने बताया कि राज्य के स्वास्थय विभाग द्वारा बाल एवं जननी मृत्यु दर को और घटाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहें हैं जिस तहत मारू दर्जे की खून की कमी से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं की पहचान के लिए एक विशेष प्रौजेक्ट आरंभ किया गया है। इसी प्रौजेक्ट अधीन ऐसी महिलाओं, जिनका होमियो गलोबिन 7 मि.ग्राम से कम है, की पहचान करके उनको मौके पर उचित चिकित्सा सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है। राज्य के सभी प्राईमरी स्वास्थय केंद्रों और सब-केंद्रों में खून में होमियो गलाबिन की दर पता लगाने के लिए प्रयोग किए जाने वाली साजो समान मुहैया करवाये गये हैं। उन्होंने कहा कि जिला स्वास्थय अधिकारियों को इन केंद्रों में आवश्यक दवाईयां उपलब्ध करवाने के लिए कठोर निर्देश जारी किए गये हैं।
स्वास्थय मंत्री अनुसार इस स्कीम को और कारगर ढंग से चलाने के लिए पंजाब सरकार आशा वर्करों को प्रत्येक केस के पीछे 250 रुपये का विशेष भत्ता देना स्वीकार किया है ताकि खून की कमी से ग्रस्त गर्भवती महिलाओं को मौके पर उचित चिकित्सा सुविधा मिल सके। उन्होंने बताया कि सात मि.ग्राम से कम खून वाली गर्भवती महिलाओं की अति कमी का शिकार माना जाता है। उन्होंने कहा कि स्वास्थय कार्यकर्ताओं की सुविधा के लिए दिशा निर्देशों को आम भाषा में प्रकाशित कर वितरित किया गया है ताकि ऐसे मामलों को तिमाही आधार पर पुन: जांचा जा सके।
स्वास्थय विभाग की प्रधान सचिव श्रीमती विनी महाजन ने इस संबंधी और जानकारी देते हुए बताया कि दिसंबर, 2012 तक 3,411 आशा कार्यकर्ताओं को ऐसे केसों को ढूंढने और हल करने के बदले मानदेय दिया जा चुका है। 6,55 आशा कार्यकर्ताओं को एक अलग स्कीम, जिसमें नवजन्मे बच्चे का भार जन्म समय 2.5 कि.ग्राम से कम होता है और तीन माह के भीतर भीतर आशा कार्यकर्ताओं की मेहनत से इन बच्चों ने 2 कि.ग्राम और भार ग्रहण किया, मानदेय जारी किया जा चुका है।