इस्लामाबाद - पाकिस्तान की सरकार अपनी कमजोरियों के कारण 26 नवंबर के मुंबई हमले के मास्टरमाइंड आतंकवादी हाफिज सईद की जमानत को चुनौती देने से पीछे हट सकती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने पिछली सुनवाई में मुंबई हमले मामले पर निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए दो महीने का समय तय किया था लेकिन करीब डेढ़ महीने गुजर जाने के बावजूद ट्रायल कोर्ट किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है।
उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा था कि तय अवधि में निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने की दशा में वह लखवी की जमानत रद्द कर देगी। वहीं, सरकार के तरफ से उसकी जमानत को चुनौती देने के बारे में अबतक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। अधिकारी ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार लखवी की जमानत को पुन: चुनौती देने के प्रति गंभीर नहीं है। वहीं, हाईकोर्ट ने सरकार की अपील पर सुनवाई करते हुए कहा था कि यदि लखवी के बचाव पक्ष के वकील मामले में देरी के लिए जिम्मेदार पाए जाते हैं तो वह उसकी जमानत रद्द कर देगी, लेकिन अब स्थिति एकदम अलग है। उन्होंने कहा कि इस मामले में देरी के लिए अभियोजन पक्ष के कुछ वकील जिम्मेदार हैं, जिन्हें सरकार हर सुनवाई में उपस्थित होने के लिए खासी रकम देती थी।
उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय द्वारा मामले में निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए दो महीने की तय अवधि के बावजूद सरकार लखवी की जमानत को पुन: कैसे चुनौती दे सकती है, जब अभियोजन पक्ष के कुछ वकील ही इसमें देरी कर रहे हैं। अधिकारी ने कहा कि सरकार ने कुछ महीने पहले लाहौर के वकील मिसबाह-उल-हसन काजी और सेवानिवृत्त न्यायाधीश अकरम कुरैशी को मुंबई हमले मामले में अभियोजक नियुक्त किया था। ये दोनों हर तारीख पर उपस्थित होने के लिए बड़ी रकम की मांग कर रहे हैं जिसके कारण सिर्फ उनके फीस पर लाखों रुपए खर्च हो जा रहे हैं। अत: इस मामले में जितनी सुनवाई होगी, उनकी फीस उतना ही अधिक होती जाएगी।
पाकिस्तान की सरकार इसी कमजोरी के कारण लखवी की जमानत को चुनौती देने से परहेज कर सकती है। उन्होंने कहा कि काजी और कुरैशी दोनों ने अभियोजक एजेंसी से फीस के तौर पर तीन-तीन करोड़ रुपये की मांग की। इनके फीस का मुद्दा नहीं सुलझने से भी मामले की सुनवाई प्रभावित होगी। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार मुंबई हमले में धीमी सुनवाई के लिए लगातार पाकिस्तान की आलोचना करती रही है। पिछले साल दिसंबर में लखवी की जमानत के बाद भारत की आलोचना और बढ़ गई। इस मामले में छह अन्य आरोपी अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हमन अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जामिल अहमद और युनूस अंजुम करीब छह साल से रावलपिडीं के आदियाला जेल में बंद हैं।