चंडीगढ़ - राज्य में नीली क्रांति के युग को और आगे ले जाने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने राज्यभर में 25 करोड़ रुपए की लागत से सभी के सभी 14 मत्स्य फार्मों के आधुनिकीकरण के लिए सहमति दे दी है। मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए खाका तैयार करने हेतु मंगलवार को सुबह अपने निवास स्थान पर एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए बादल ने कहा कि सभी मतस्य फार्मों /हैचरीयों में अनिवार्य तौर पर अति आधुनिक बुनियादी ढांचा होना चाहिए, ताकि मत्स्य के उत्पादन में बढ़ोतरी की जा सके।
उन्होंने कहा कि राज्य में मत्स्य की पूंग की मांग और आपूर्ति में बड़ी दरार है, जिसको सरकारी फार्मों पर मत्स्य की पूंग का बड़े स्तर पर उत्पादन करके ही पूरा किया जा सकता है। श्री बादल ने कहा कि राज्य के सभी फार्म/हैचरियों को छह महीने में अति आधुनिक बुनियादी ढांचा मुहैया करवाया जाएगा, ताकि राज्य में मत्स्य पालन को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जा सके। एक अन्य महत्त्वपूर्ण फैसला लेते हुए मुख्यमंत्री ने इन मत्स्य फार्मों पर छोटी फीड मिलें स्थापित करने की भी स्वीकृति दी है, ताकि मत्स्य पालकों को गुणात्मक फीड मुहैया करवाई जा सके। इसी प्रकार उन्होंने इन मत्स्य फार्मों पर ‘मत्स्य प्रशिक्षण हुनर केंद्र’ खोलने की भी स्वीकृति दे दी है, ताकि मत्स्य पालकों को बेहतर प्रशिक्षण मुहैया करवाने के साथ-साथ बेरोजगार नवयुवकों को मत्स्य पालन के व्यवसाय की तरफ प्रेरित किया जा सके।
उन्होंने कहा कि राज्य में मतस्यपालन की बड़ी संभावनांए है तथा यह व्यवसाय खेती के संकट के कारण समस्याओं में फंसी किसान का भाग्य बदल सकता है। उन्होंने कहा कि मत्स्य पालकों को वैज्ञानिक पगों पर ज्ञान मुहैया करवाकर मत्स्य उत्पादन की क्षमता को और बढ़ाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने देश विदेश की प्रमुख संस्थानों के अतिरिक्त गढ़वासु से राज्य के मतस्यपालन विभाग के उच्च अधिकारियों को बढिय़ा प्रशिक्षण मुहैया करवाने पर बल दिया। उन्होंने मत्स्यपालन विभाग को मत्स्य फार्मो पर प्रासेसिंग केंद्र खोलने की संभावनाओं का पता लगाने के लिए कहा ताकि मत्स्य पालकों की आय में बढ़ोतरी हो सके। श्री बादल ने मतस्य पालन विभाग के मौजूदा स्टाफ की तैनाती पर तर्कमयी आधार पर करने की सहमति देने के अतिरिक्त रिक्तियों पर भर्ती के लिए सहमति भी दे दी है। इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख व्यक्तियों में वितायुक्त पशुपालन, डेयरी तथा मत्स्य पालन डा. जी विजरालिंगम, विशेष प्रधान सचिव व अन्य अधिकारी शामिल थे।