चंडीगढ़ - भारत सरकार की तरफ से नेशनल हैल्थ मिशन के तहत कार्ययोजना 561.62 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। पंजाब की तरफ से भेजी कार्ययोजना को स्वास्थ्य व परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से प्रशासनीक मंजूरी भेज दी गई है। यह जानकारी स्वास्थ्य व परिवार कल्याण विभाग की प्रमुख सचिव विनी महाजन ने दी। प्रमुख सचिव ने बताया कि नि:शुल्क व सबसिडी वाली स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 198.92 करोड़ रुपए की मंजूरी मिली है। इनमें नि:शुल्क व सबसिडी वाली स्वास्थ्य सेवाओं में गर्भवती महिलाएं, बच्चे, पांच साल तक की नन्हीं बच्चियों के नि:शुल्क इलाज व दवाइयां, स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों की नि:शुल्क स्क्रीनिंग व टीकाकरण शामिल हैं।
इसी तरह गर्भवती महिलाओं व बच्च्चों की सर्विस डिलीवरी की ट्रैकिंग को पहले से भी मजबूत किया जाएगा। इस फंड में असरदार स्वास्थ्य संभाल सेवाओं में अन्य मानवीय संसाधनों के लिए भी मंजूरी मिली है। इसके अलावा 217.13 करोड़ रुपए फ्री ड्रग एंड कंज्यूमेबल, स्वास्थ्य संस्थाओं के अपग्रेडेशन (जिनमें सिविल वर्क और साजो सामान शामिल हैं), नए जच्चा-बच्चा विंग और टेंलीमेडिसिन केंद्रों को चलाने के लिए मंजूर हुआ है। इस प्रोग्राम के तहत आशा, अस्पतालों में आयूष सुविधाएं, मोबाइनल मेडिकल यूनिट के जारिए भी सुविधा उपलबध करवाई जाएगी। विनी महाजन ने बताया कि स्वास्थ्य संभाल की सेवाओं की तरफ विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसमें कुआलिटी एशोरेंस, सेनीटेशन, स्वच्छ भारत अभियान शामिल हैं।
इसमें गुणवत्ता की ज़रूरत को पूरा करने वाली स्वास्थ्य संस्थाओं को सामानित किया जाएगा। इसके लिए राज्य, जिला और संस्था स्तर पर रिव्यू करने के लिए कमेटियों का गठन कर लिया गया है। नेशनल अर्बन हैल्थ मिशन के तहत चुने हुए शहरों की अर्बन स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत करने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया जा रहा है और स्वास्थ्य संभाल सेवाओं के लिए आउटरीच कैंप लगाए जा रहे हैं। इस प्रोग्राम के तहत 93 अर्बन प्राइमरी स्वास्थ्य केंद्रों में विशेष तौर पर 600 एएनएम की भर्ती की जानी है। स्पेशल आउटरीच कैंप लगाकर स्लम व अन्य जरूरतमंद लोगों की आबादी को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ पहुंचाया जा रहा है। नेशनल अर्बन हैल्थ मिशन के तहत महिला आरोगया समितियों का गठन किया गया है। इसके लिए 41.43 करोड़ रुपए की मंजूरी मिली है। महाजन ने कहा कि नॉन कयिनीकेबल डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के तहत बुजुर्गों को स्वास्थ्य सेवाएं और प्रोग्राम फॉर प्रीवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ डेफनैस शुरू किया जाएगा। इस प्रोग्राम के लिए 7.71 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।