न्यूयॉर्क - अमेरिका की एक कोर्ट ने एक वंपनी को भारतीय मजदूरों को दो करोड़ डॉलर का मुआवजा देने फरमान जारी किया है। इन मजदूरों को वैटरीना तूफान से तबाह ऑयल रिग की मरम्मत के लिए लाया गया था। अमेरिकी इतिहास में मजदूरों की तस्करी का यह अब तक का सबसे बड़ा मामला है। तकरीबन 200 मजदूरों ने अलबामा स्थित सिग्नल इंटरनेशनल पर धोखाधड़ी और शोषण करने का इल्जाम लगाया था। पेडरल कोर्ट ने इन मजदूरों के पक्ष में पैसला सुनाया है।
कंपनी ने दिवालियेपन से सुरक्षा के लिए आवेदन किया है। मंजूरी के बाद ऐसे 11 मामलों से जुड़े 200 भारतीय मजदूरों को मुआवजा पाने के हकदार हो जाएगें। कंपनी भारतीय मजदूरों के लिए माफीनामा भी जारी करेगी। कंपनी और उससे जुड़े एजेंटों ने मजदूरों को वेल्डर, पाइप फिटर आदि जैसे कामों में लगाने का वादा किया था। मजदूरों ने इल्जाम लगाया है कि उन्होने भरती करने वालों और वकीलों को दस हजार से बीस हजार डॉलर का भुगतान भी किया था।
कंपनी के द्वारा बेहतर नौकरी, ग्रीन कार्ड और परिवार समेत अमेरिका में स्थायी निवास जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक का वादा किया गया था। पीडितों का केस लडऩे वाली संस्था सदर्न पॉवर्टी लॉ सेंटर (एसपीएलसी) के मुताबिक शुल्क चुकाने के लिए भारतीय मजदूरों को अपनी संपत्तियां तक बेचनी पड़ी थी। वर्ष 2006 में अमेरिका पहुंचने पर इन मजदूरों को अपने ठगे जाने का अहसास हुआ। कंपनी की प्रताडऩा यहीं नहीं रुकी। अमेरिका में ठिकाना देने के बदले प्रत्येक मजदूर से प्रति माह 66.66 हजार रुपये वसूले गए थे। इतने पर भी एक छोटे से कमरे में लोगों को ठहराया गया था।