चंडीगढ़, 24 फरवरी: पंजाब के मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल के वकीलों द्वारा विसकानसिन राज्य की फैडरल अदालत में आठ गवाह एवं 20 अन्य सबूत पेश करके यह सिद्ध किया गया है कि स. बादल को उनके खिलाफ अगस्त 2012 में ‘सिक्खज़ फॉर जस्टिस ’ नाम के एक संगठन द्वारा दायर किए केस के संबंध में कोई भी सम्मन प्राप्त नही हुआ।
यह जानकारी देते हुए आज यहां मुख्यमंत्री कार्यालय के एक प्रवक्ता ने बताया कि उक्त संगठन द्वारा मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल विरूद्ध यह जानते हुए कि वह (स. प्रकाश सिंह बादल) उन दिनों अमेरिका में होंगे, एक केस दायर करवाया गया था जिसके तहत इस संगठन द्वारा स. बादल को नीजि रूप में इस केस के संबंधी दस्तावेज़ हाथो हाथ सौंपे जाने अनिवार्य थे।
संगठन द्वारा अदालत में यह जानकारी दी गई कि केस संबंधी दस्तावेज़ स. बादल को नौ अगस्त को स्थानीय हाई स्कूल में सौंपे गये थे परंतु अदालत की 21 फरवरी, 2013 को पेशी दौरान स. बादल के वकीलों द्वारा आठ गवाहियों और 20 अन्य सबूत पेश करके यह साबित किया गया कि स. प्रकाश सिंह बादल को स्थानीय हाई स्कूल में दस्तावेज़ सौंपे जाने का दावा बिल्कुल है क्योंकि स. बादल कभी भी इस हाई स्कूल या इसके इर्द गिर्द गये ही नही। अदालत में पेश किए गवाहों में स्टेट फैडरल विभाग के 2 वह अधिकारी भी शमिल थे जिनको मुख्यमंत्री के विसकानसिन में 5 दिवसीय ठहराव के दौरान उनकी सुरक्षा की जिम्मेवारी सौंपी गई थी। इन अधिकारियेां ने अदालत में शपथ लेते हुए इस बात की पुष्टि की कि स. बादल संपूर्ण समय दौरान उनकी कठोर सुरक्षा में रहे और वह इस स्थानीय हाई स्कूल या इसके आसपास कहीं भी नही गये, जैसे कि मुदई पक्ष द्वारा उनको हाई स्कूल में सम्मन दिए जाने का दावा किया जा रहा है जो सरासर गलत है। इसी प्रकार अन्य गवाहों जो किसी ना किसी रूप में स. बादल क ी सुरक्षा के लिए किए गये प्रबंधों में शामिल थे या उन स्थानों पर तैनात थे जहां स. बादल गये थे, द्वारा भी स. बादल के इस हाई स्कूल में ना जाने को स्पष्ट किया गया। इनके अतिरिक्त दो अन्य व्यक्तिगत गवाहों जो उस दिन हाई स्कूल में उपस्थित थे, में से एक गवाह स्थानीय पुलिस मुखी और दूसरा द्विभाषीया था। इनमें से स्थानीय पुलिस मुखी ने अपने बयान में यह स्पष्ट किया कि उस दिन स. बादल हाई स्कूल में आये ही नही जिस कारण उनको सम्मन नही दिए जा सकते थे जबकि द्विभाषीय ने अपने बयान में कहा कि गलती से मुख्यमंत्री की बजाये उसको संबंधित दस्तावेज़ दिए गये थे।
इस मामले की सुनवाई के दौरान जज द्वारा मुदई पक्ष के दावों को गहरे शक के घेरे में लेते हुए इस मामले की संपूर्ण जांच करने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया। प्रवक्ता ने आगे बताया कि अदालत ने दोनों पक्षों को लिखित बहस देने के लिए कहा ताकि जज द्वारा यह फैसला किया जा सके कि इस केस को आगामी कार्रवाई के लिए आज्ञा दी जाये या नही।