बैंकॉक - थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में शनिवार को शुरू हुए 60 देशों के संस्कृत विद्वानों के सम्मेलन में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का अलग ही रूप सामने आया। सम्मेलन के उद्घाटन मौके पर संस्कृत में धारा प्रवाह भाषण देकर उन्होंने इस देवभाषा प्रेमियों का दिल जीत लिया। उन्होंने संस्कृत को आधुनिक और सार्वभौमिक भाषा करार दिया और कहा कि इसकी परंपरा गंगा नदी के समान है। एक संस्कृत श्लोक की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि तुच्छ मानसिकता के लोग कुछ लोगों को अपना और कुछ को दूसरे ग्रह से आए व्यक्ति के तौर पर भेद करते हैं, जबकि व्यापक सोच वाले लोग पूरे ब्रह्मांड को अपना मानते हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी 2 जुलाई को इस सम्मेलन के समापन समारोह में शामिल होंगी। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा कि संस्कृत भाषा को बढ़ावा दिया जाना चाहिए क्योंकि यह लोगों के मष्तिष्क को शुद्ध करती है और इस तरह से पूरे विश्व को पवित्र करती है। उन्होंने संस्कृत भाषा की तुलना गंगा से करते हुए कहा कि गंगा गोमुख से सागर में गिरने तक पवित्र बनी रहती है। उसने सहायक नदियों को पावन बनाया जिनको गंगा की प्रकृति मिली।
इसी तरह संस्कृत है जो स्वयं तो पवित्र है ही और अन्य जो भी उसके संपर्क में आया, उन सभी को पवित्र बनाया। सुषमा ने यह भी ऐलान किया कि विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव (संस्कृत) का पद तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों का विचार है कि भाषा पहचान, अनुवाद, साइबर सुरक्षा और कृत्रिम खुफिया सेवा के दूसरे क्षेत्र के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने में संस्कृत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।