नई दिल्ली/चंडीगढ,14 फरवरी: केन्द्र सरकार प्रस्तावित गुडज एंड सर्विस टैक्स (जी एस टी) लागू करने से पहले कम साधनों वाले राज्यों के हितों को सामने रखे और ग्रामीण विकास कर (रूरल डिवैलपमैंट सैस)खरीद कर(परचेज टैक्स)और बुनियादी ढांचा विकास कर(र्इंफ्रास्ट्रक्चर डिवैलपमैंट सैस) को इस कानून से बाहर रखे।
यह जानकारी पंजाब के वित मंत्री स. परमिन्द्र सिंह ढीडसां ने आज नई दिल्ली में केन्द्रीय वित मंत्री श्री पी चिदम्बरम के साथ विभिंन राज्येां के वित मंत्रियों की बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत दौरान दी। उन्होने कहा कि केन्द्र सरकार राज्यों के साधनों पर कब्जा न करे यदि केन्द्र सरकार जी एस टी संबधी कानून को पास करवाना चाहती है तो उसको चाहिए कि वह कम से कम 10 वर्ष तक राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई विश्वसनीय बनाए। उन्होने कहा कि कम साधनों वाले राज्येां के सनमुख ग्रामीण विकास कर , ब्रिकी कर और बुनियादी ढांचा विकास कर इस प्रस्तावित कानून से बाहर रखे जाने जरूरी है।
स. ढीडसां ने दोष लगाया कि केन्द्र में कांग्रेस की अध्यक्षता वाली यू पी ए सरकार की राज्यों विरोधी नीति प्रत्यक्ष है और वह इस कानून द्वारा राज्यों के साधनों पर जाहिर तौर पर कब्जा करना चाहती है। उन्होने कहा कि कांगे्रस सरकारों वाले राज्य भी धीमी आवाज में इस कानून का विरोध कर रहे है।