चंडीगढ़ - वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीडि़तों के लिए इंसाफ तथा दोषियों को सजा दिलाने की मांग को लेकर किया गया पंजाब बंद शांतिपूर्ण रहा तथा इसका मिला-जुला असर देखने को मिला लेकिन सिख संगठनों ने सफल बंद का दावा किया है। बंद का आह्वान दंगों की मुख्य गवाह जगदीश कौर और जगमोहन सिंह की अपील पर अखिल भारतीय सिख छात्र संगठन (ए.आई.एस.एस.एफ.) सहित विभिन्न सिख संगठनों ने किया था। इस दौरान अमृतसर, लुधियाना, जालंधर, भटिंडा, गुरदासपुर, तरनतारन सहित राज्य के विभिन्न शहरों में सिखों ने विरोध प्रदर्शन किए व जबरन दुकानें और बाजार बंद कराए।
प्रदर्शनकारियों ने रेल लाइनों पर धरना देकर रेलगाडियों का आवागमन भी बाधित किया। अधिकांश शिक्षण संस्थान बंद रहे लेकिन परिवहन सेवाएं सामान्य रहीं तथा दवाइयों की दुकानें भी खुली रहीं। सिख संगठनों ने दंगों तथा इनमें मारे गए हजारों सिखों के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराते हुए इस पार्टी पर दोषियों को बचाने का भी आरोप लगाया। अमृतसर में पुलिस ने बंद को विफल बनाने के लिए सोची-समझी योजना के तहत सुबह 5.10 बजे ही नेताओं की धरपकड़ शुरू कर दी थी। बसों का पहिया जाम क रने जा रहे ए.आई. एस.एस.एफ. अध्यक्ष करनैल सिंह पीर मोहम्मद, बीबी जगदीश कौर व उनके साथियों को बस स्टैंड के समीप से गिरफ्तार कर लिया गया जबकि रेल यातायात अवरुद्ध कर रहे अमरबीर सिंह ढोट व उनके साथियों को रामबाग फाटक से गिरफ्तार कर लिया गया।
ढोट व साथियों ने कुछ पलों के लिए रेलवे ट्रैक पर बैठकर नारेबाजी भी की। नतीजतन शताब्दी एक्सपै्रस व अन्य गाडियां निर्धारित समय से कुछ देर से रवाना हुईं। पीर मोहम्मद को मकबूलपुरा थाने तथा ढोट को छहर्टा थाने में रखा गया, बाद में उन्हें मकबूलपुरा थाने लाया गया। गिरफ्तारी से पहले ढोट की पुलिस अधिकारी परमपाल सिंह सिद्धू व अन्य से बहस भी हुई लेकिन पुलिस ने उच्चाधिकारियों की ओर से गिरफ्तारी के दिए आदेशों का हवाला देकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया। इसी तरह कंवरबीर सिंह गिल को भी देर रात ही गिरफ्तार कर लिया गया था।
गिरफ्तारी के बाद इन नेताओं ने अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। बाद में देर सायं ढोट, पीर मोहम्मद, गिल व अन्य नेताओं को रिहा कर दिया गया। सिख यूथ फैडरेशन भिंडरांवाला के प्रमुख बलवंत सिंह गोपाला को शुक्रवार रात ही उनके निवास पर नजरबंद कर दिया गया था। गांव गोपाला पुलिस छावनी में बदल दिया गया था। एस.जी.पी.सी. कार्यालय तेजा सिंह समुंद्री हॉल में आज सन्नाटा छाया रहा। बंद के चलते कोई भी अधिकारी व कर्मचारी यहां दिखाई नहीं दिया। एस.जी.पी.सी. ने बंद से एक दिन पहले ही नोटिस चिपका कर पंजाब दिवस (1 नवम्बर) को छुट्टी का ऐलान कर दिया था।
बंद की वजह से श्रद्धालु भी कम संख्या में हरिमंदिर साहिब पहुंचे। पुलिस ने बताया कि ऑल इंडिया सिख स्टूडैंट्स फैडरेशन (ए.आई. एस. एस.एफ.) और सिख स्टूडैंट्स फैडरेशन (एस.एस.एफ.) के सदस्य सुबह लुधियाना के गुरुद्वारा दुख निवारण के निकट रेल पटरी पर एकत्र हुए और लगभग 5 घंटे तक वहां जमे रहे। उन्होंने बताया कि इससे शताब्दी एक्सप्रैस, शान-ए-पंजाब, कटिहार एक्सप्रैस और जनसेवा एक्सप्रैस सहित कुछ ट्रेनों का परिचालन कुछ घंटों तक प्रभावित रहा। लुधियाना के पुलिस आयुक्त प्रमोद बान ने बताया कि किसी अप्रिय घटना की खबर नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है।