चंडीगढ़ - महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अधिनियम (मनरेगा) के तहत पंजाब में साल 2013-14 में कुल सृजित श्रम दिवसों में महिलाओं का श्रम दिवस 53 प्रतिशत रहा । यह भागीदारी इस अधिनियम में अपेक्षित 33 प्रतिशत की अनिवार्य सीमा से काफी अधिक है । वर्ष 2006 में शुरू की गई इस योजना से अब तक कुल 1657 करोड़ श्रम दिवसों के रोजगार के सृजन से कामगार परिवारों को 163754 करोड़ रुपए की राशि वितरित की गई है ।
वर्ष 2008 से हर वर्ष औसतन पांच करोड़ ग्रामीण परिवारों को रोजगार प्राप्त हो रहा है, जिनमें अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों की भागीदारी 48 प्रतिशत है । इस कार्यक्रम की शुरुआत से प्रति श्रम दिवस औसत मजदूरी 81 प्रतिशत बढ़ी है । अधिसूचित मजदूरी दरें मेघालय में न्यूनतम 153 रुपए तथा हरियाणा में अधिकतम 236 रुपए तक है। आवंटन और कवरेज की दृष्टि से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन दूसरा सबसे बड़ा कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य वर्ष 2021-22 तक दस करोड़ गरीब ग्रामीण परिवारों को स्वशसहायता समूहों और गांवों में संघ संगठित करके लाभान्वित करना है । मार्च 2014 तक इसे 27 राज्यों तथा पुड्डंचेरी संघ राज्य क्षेत्र में एनआरएलएम शुरू कर दिया गया है । इसकी सहायता से लगभग एक लाख 58 हजार युवाओं ने अपने उद्यम स्थापित कर लिए हैं तथा 24 लाख 50 हजार महिला किसानों को भी सहायता दी गई है ।