पंजाब के मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल ने आज बलात्कार खिलाफ आर्डिनैंस लाने का सावधानी से स्वागत करते हुए इस आर्डिनैंस को जहां एक प्रोग्रेसिव कदम बताया, वहीं साथ ही कहा कि यह कदम एक ऐतिहासिक जरूरत के साथ-साथ इस मसले के हल के लिए सैंविधानिक पहलकदमी करने के लिए बनी देश व्यापी सर्व सम्मति से पूरी तरह खरा नही उतरा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने आश्चर्यजनक ढंग से जस्टिस वर्मा आयोग और महिला सगठनों के साथ-साथ प्रसिद्ध सामाजिक प्रतिनिधियों और कानूनी विशेषज्ञों की महिलाओं विरूद्ध अपराधों के लिए कठोर उपबंध तय करने वाली सिफारिशों को पूरी तरह नज़रअंदाज किया है।
स. बादल ने कहा कि इस आर्डिनैंस के जारी होने के समय ने भी सवाल खड़े किए हैं क्योंकि सरकारी पक्ष ने तो पहले ही दिल्ली सामूहिक बलात्कार की घटना के मुख्य अपराधीयों में से एक को बाल अपराध के तहत ‘मुक्त’ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह बहुत ही अजीबो गरीब बात है कि सरकार ने पहले तो सभी मुख्यमंत्रीयों की इस मामले पर सिफारिशें मांगी थी और बाद में उनके द्वारा बलात्कार मामलों के नाबालिग अपराधियों की अधिक से अधिक आयु को घटाने की गई सिफारिश को नज़रअंदाज कर दिया गया। स. बादल ने कहा कि वह इस बात के पक्षधर हैं कि मतदान की आयु को 21 से 18 वर्ष किए जाना इस तरफ रास्ता बनाता है कि ऐसी ही विधि द्वारा बलात्कार के केसों के नाबालिग अपराधियों की आयु भी घटाई जा सकती है। सरकार ने ना केवल राज्य सरकारों द्वारा की गई सिफारिशों को अनदेखा किया है बल्कि दिल्ली सामूहिक बलात्कार केस की एफ आई आर द्वारा ऐसा प्रबंध भी किया कि महिलाओं खिलाफ होने वाले इस घिनौने अपराध का एक मुख्य आरोपी किसी भी सज़ा से वंचित रह जाएगा जोकि एक अजीबोगरीब बात है। यह साबित करता है कि इस मुद्दे पर सरकार की नीयत साफ नही है।
स. बादल ने कहा कि उन्होंने इस मामले पर व्यापक कानून द्वारा ठोस सैंविधानिक संशोधनों की जोरदार वकालत की थी जिसका उद्धेश्य केवल महिलाओं खिलाफ होने वाले अपराधों के आरोपियों को सज़ा देना ही नही था पर असल में महिलाओं का कई विधियों द्वारा सशक्तीकरण करना था। उन्होंने कहा कि ‘आप किसी भी ढंग से महिलओं के खिलाफ होने वाले अपराधों को समाज में उनकी बुरी दशा से अलग नही कर सक ते।’ उन्होंने कहा कि वास्तव में समाज में महिलाओं के रूतबे को बढ़ाने के लिए आवश्यक कदम उठाये जाने आवश्यक हैं और ऐसा किसी सशक्तीकरण के बिना कोई भी कानून या ढंग पूरी तरह असरदायक साबित नही हो सकता।