टोकियो - प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दूसरों के सागर पर ‘अतिक्रमण’ करने की कुछ देशों की ‘विस्तारवादी’ प्रवृत्ति की सोमवार को निंदा की। उनकी यह टिप्पणी परोक्ष रूप से चीन के खिलाफ मानी जा रही है जिसका जापान के साथ समुद्री विवाद है।
मोदी ने यहां भारत और जापान के व्यापार जगत की हस्तियों को संबोधित करते हुए कहा कि समूचा विश्व स्वीकार करता है कि 21वीं सदी एशिया की होगी, लेकिन मेरा एक सवाल है- 21वीं सदी कैसी होनी चाहिए? हमें इसका उत्तर देना है। यह इस पर निर्भर करेगा कि हमारे (भारत और जापान के बीच) संबध कितने गहरे हैं।
उन्होंने कहा कि हमें निर्णय करना होगा कि हम ‘विकासवाद’ चाहते हैं या ‘विस्तारवाद’, जिसका परिणाम विघटन की ओर जाता है। जो बुद्ध के रास्ते को मानते हैं और ‘विकासवाद’ पर भरोसा रखते हैं, वे विकास करते हैं। लेकिन हम देखते हैं कि जो 18वीं सदी के विचार रखते हैं, वे अतिक्रमण में शामिल हैं और (दूसरों के) सागरों में प्रवेश करते हैं।
उन्होंने जापान और भारत के बीच निकट और गहरे सहयोग की जरूरत पर बल दिया ताकि वैश्विक स्तर पर विस्तारवाद की बजाय विकासवाद के मुद्दे की हिमायत की जा सके।