चंडीगढ - पंजाब सरकार ने मानवीय तस्करी को रोकने के लिए टै्रवल ऐजटों द्वारा पेश की पेशकारी पर विचार करते हुये जायज मांगे मान ली हैं।
आज यहां इस संबधी जानकारी देते हुये पंजाब सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि पंजाब के उपमुख्यमंत्री स. सुखबीर सिंह बादल के साथ हुई मुलाकातों और लंबे विचार विमर्श के बाद पंजाब सरकार ने यह मांगे मान ली हैं ताकि गैर कानूनी मानवीय तस्करी को रोका जा सकें। उपमुख्यमंत्री ने प्रमुख सचिव गृह को कहा कि मानवीय तस्करी को रोकने के लिए बने एक्ट में आवश्यक सुधार के बाद केबिनेट में लाया जाए।
जिक्र योग है कि टै्रवल ऐजट एसोसिएशनों ने शंका जाहिर की थी कि पी एच एस ए अधीन लाईसैस होने के कारण उनको एंबेसियेां और यूनिवर्सिटयों में अप्लाइ करते समय दिक्कत आने की शंका जाहिर की थी इस के अतिरिक्त उनके कार्य पर प्रश्र चिंह लगने की भी शंका जाहिर की गई थी उन्होने इस संबधी सुझाव दिया था कि इस एक्ट का नाम ट्रेवल इंडस्ट्रीज रैगुलाईजेशन एक्ट रखा जाए जिसको पंजाब सरकार ने स्वीकृत कर लिया हैं।
प्रवक्ता ने बताया कि एसोसिएशनों ने एक्ट के सैक्शन 10 ने भी आवश्यक सुधार किया जाए जिस संबधी उन्होने शंका जाहिर की कि जिन लोगों को एंबेसी द्वारा वीजा देने से ना किये जाए और जिसमें ट्रेवल एजेट का कोई कसूर नही है में लोगेां द्वारा दर्ज की शिकातयों के कारण उनको पुलिस द्वारा परेशान किया जा सकता है। इसी प्रकार विद्यार्थियों को भी यूनिवर्सिटयों में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है और एजुकेशन और कंसलटैंटस पर झूठे आरोप लगाए जा सकते है इस पर गौर करते हुये इस संबधी भी जरूरी संशोधन करने के लिए कहा गया है कि सबसे पहले डिप्टी कमीशनर के पास शिकायत दर्ज करने के लिए प्रस्ताव मान लिया गया है जिस संबधी डीसी स्वयं या एडीसी या संबधित एस डी एम पूरी जाचं करवाएगा इसके बाद ही दोषी विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।
इसके अतिरिक्त एक्ट के सैक्शन 6 में लाईसैंस कैन्सल या सस्पैंड करने संबधी शंका को दूर करने के लिए सुझाव मान लिया हैं । इस के अतिरिक्त इश्तिहार जारी करने के लिए एक्ट के सैक्शन 7 के सुझावों पर भी गौर किया गया है इसके साथ ही एक्ट के सैक्शन 13 संबधी शंकाओं को दूर किया गया है जिसमें गलत काम करने के लिए तीन वर्ष की सजा निर्धारित की गई थी पंरतु पंजाब सरकार ने इस पर विचार करते हुये सजा अदालत पर छोड़ दी जो अधिक से अधिक 7 वर्ष तक हो सकेगी।
इस के अतिरिक्त एसोसिएशनों ने कलाईंटस के डिटेल और प्रति माह चार्ज की जाने वाली फीस संबधी भी सुझाव पेश किये थे जिसके तहत निर्णय किया गया है कि कंसलटैसी फर्म साल मे दो बार 6 महीने बाद जानकारी उपलब्ध करवाएगी। इसके अतिरिक्त बेची गई टिकटों संबधी डिप्टी कमीशनर को प्रति माह आन लाईन जानकारी उपलब्ध करवाएगी।
फीस संबधी एसोसिएशनों की शंकाओं को दूर करते हुये निर्णय लिया गया है कि जो फर्में पांच वर्षो से काम कर रही हैं जिनको एक लाख फीस जमा करवाने पडेगी वह एक किस्त या बराबर की पांच किश्तों में फीस जमा करवा सकेगी।
इसी प्रकार टिकट बेचने वाले एजेट जिनको पच्चीस हजार रूपये जमा करवाने पड़ते थे वह पहली किश्त 10 हजार रूपये के रूप में और शेष बराबर की चार किस्तों में जमा करवाएगें। इस के अतिरिक्त सरकार ने उनका कार्य चलाने के लिए 100 वर्ग फुट वाली शर्त को भी मान लिया है।
प्रवक्ता ने पुन दोहराया कि इस एक्ट के असितत्व में आने से माल्टा कांड जैसे दुंखात भविष्य में नही घटेगें और ना ही पंजाबी नवयुवकों को ईराक, अफ्रीका, लेटिन अमेरिका या सी आई एस देशों में फंसने या परेशानी से मुक्ति मिलेगी।