चण्डीगढ़ : राज्य के कैंसर रोगियों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल ने राज्य में केंसर मरीजों के नगदी रहित इलाज आरंभ करने संबंधी योजना को स्वीकृति दे दी है जिस अनुसार राज्य सरकार ने पैनल में शामिल अस्पतालों में मुख्यमंत्री कैंसर राहत कोष अधीन पहली जनवरी, 2014 से इलाज आरंभ होगा।
इस संबंधी फैसला पंजाब के मुख्यमंत्री ने आज सुबह अपने निवास स्थान पर स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों से एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए लिया।
बिना किसी अड़चन से कैंसर के रोगियों के गुणात्मक उपचार की आवश्यकता पर बल देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के आरंभ होने से कैंसर के इलाज के लिए अधिकारियों से आगामी स्वीकृति लेने की जरूरत नहीं रहेगी और कैंसर के रोगी राज्य सरकार के पैनल में शामिल अस्पतालों में बाजिव दरों पर उपचार की बेहतर सुविधाएं प्राप्त कर सकेंगे। उनको इस संबंध में केवल अस्पताल में ही जाना पड़ेगा। स.बादल ने कहा कि यह योजना केंसर के रोगियों के लिए बड़ी लाभकारी होगी और इस अधीन समूचे इलाज का खर्चा राज्य सरकार द्वारा सहन किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि इस योजना अधीन कैंसर के रोगियों को अनिवार्य तौर पर लाभ दिया जाना चाहिए ताकि वह समय पर अपना इलाज करा सकें। उन्होंने कहा कि इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक व्यापक जागरूक अभियान भी आरंभ किया जाएगा।
बैठक दौरान मुख्यमंत्री ने तीस वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों की मधुमेह/उच्च रक्तचाप की विशष स्क्रीनिंग करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी। दिल के दौरे और स्ट्रॉक के बढ़ रहे केसों पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में ऐसी स्क्रीनिंग किए जाना समय की आवश्यकता है ताकि मूल्यवान जानों को बचाया जा सके। स.बादल को बैठक दौरान बताया गया कि यह स्क्रीनिंग प्राजेक्ट शहीद भगत सिंह नगर, मानसा, श्री मुक्तसर साहिब और तरनतारन नाम के चार जिलों में फरवरी, 2014 से एक पायलट प्राजेक्ट के तौर पर आंरभ किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को यह भी निर्देश दिए कि वह राज्य सरकार के मेडिकल कालेजों और अस्पतालों में जच्चा-बच्चा केन्द्र स्थापित किए जाएं ताकि बाल मृत्यु दर /आई एम आर/ और जननी मृत्यु दर /एम एम आर/ में ओर कमी लाई जा सके। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को जन्म समय बच्चों और माताओं का जीवन बचाने पर विशेष ध्यान देना चाहिए और इस अवसर पर उनको अनिवार्य तौर पर बढिय़ा उपचार औेर सुविधाएं मुहैया करवानी चाहिए। स.बादल ने कहा कि राज्य को बच्चों और माताओं की मृत्यु दर घटाकर देश की अन्य राज्यों के लिए उदाहरण कायम करनी चाहिए।
राज्य के लोगों को गुणात्मक चिकित्सा सेवांए उपलब्ध करवाने के लिए स्वास्थय विभाग में संपूर्ण सुधार लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए स. बादल ने कहा कि राज्य में इस उद्धेश्य के लिए कोई भी कसर शेष नही छोड़ेगी। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों, सब-डिवीज़नों और कम्यूनिटी हेल्थ सेंटरों सहित राज्यों के 100 सरकारी अस्पतालों में बुनियादी ढांचा अनिवार्य तौर पर मज़बूत किया जाना चाहिए और इसका प्रसार किया जाना चाहिए ताकि आम लोगों को सुविधांए प्राप्त हो सकें। स. बादल ने कहा कि यह अस्पताल अपातकालीन सुविधाओं से लैस होने चाहिए और 24 घंटे लोगों को गुणात्मक स्वास्थय सुविधांए मुहैया करवाई जानी चाहिए।
बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री को बताया गया कि पी जी आई एम ई आर के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रौ. राजेश कुमार स्वास्थय विभाग द्वारा दी जा रही सेवाओं पर निगरानी रख रहें हैं। यह भी बताया गया कि प्रौ. राजेश कुमार ने पहले ही राज्य के नौ जिलों में स्वास्थय सेवाओं का मूल्यांकन कर लिया है और शेष रहते जिलों में शीघ्र ही यह मूल्यांकन संपूर्ण कर लिया जायेगा।
इस अवसर पर प्रौ. राजेश कुमार ने भी राज्य में एंबूलैंस सेवाओं संबंधी मूल्यांकन रिपोर्ट मुख्यमंत्री के आगे पेश की।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री सुरजीत कुमार जियाणी, मुख्य संसदीय सचिव श्रीमती नवजोत कौर सिद्धू और श्रीमती महेन्द्र कौर जोश, प्रधान सचिव स्वास्थय श्रीमती विनी महाजन, राज्य सरकार के स्वास्थय सलाहकार डॉ. के के तलवार, मुख्यमंत्री के विशेष प्रधान सचिव श्री के जे एस चीमा और प्रमुख डाक्टर और स्वास्थय विभाग के सीनियर अधिकारी शामिल थे।