-निगम कमिश्नर ने तंगहाल निगम को कमज़ोर हुई आर्थिक स्थिति से बाहर निकालने के किये प्रयास
चंडीगढ़, 6 नवंबर - चंडीगढ़ नगर निगम की खस्ताहालत आर्थिक स्थिति निगम अधिकारीयों के चुनौती से कम नहीं रही। कंगाली का दंश झेल रही नगर निगम के कारण शहर के जहां विकास कार्य लगभग ठप्प पड़े थे वहीं निगम कर्मचारियों को तनखाह देने तक के लाले पड़ गए थे।
मंदहाल आर्थिक तंगी के बीच फजीहत झेल रहे निगम प्रशासक को उभारने के लिए निगम कमिश्नर अमित कुमार के प्रयास सराहनीये रहे। उन्होंने जहां फंड की घाट के कारण शहर में प्रापर्टी टैक्स स्थित पानी के बिलों और अन्य बकाया राशि को वसूलने के लिए भरसक प्रयास कर निगम को कंगाल होने से बचाया वहीं आर्थिक तंगी के बीच निगम प्रशासन को सकुशल चलाने में भी सफल रहे।
उन्होंने अपनी कुशलता से कर्मचारी से लेकर अधिकारी तक को एकता के सूत्र में परो कर एवं एकजुटता के साथ वह कार्य कर दिखाया जो देखने में असंभव नजर आ रहा था। नगर निगम आयुक्त ने निगम के वित्तीय संचालन को समर्थन देने के लिए सहायता अनुदान की मांग की थी। अनुरोधित अनुदान पर कोई जवाब या मंजूरी नहीं मिलने के बावजूद, आयुक्त ने निगम के वित्त का कुशलतापूर्वक प्रबंधन किया।
सुदृढ़ वित्तीय प्रबंधन के माध्यम से, आयुक्त यह सुनिश्चित करने में सफल रहे कि सभी दायित्वों का भुगतान किया गया और सभी बकाया समय पर चुकाए गए। इसमें हर महीने की नियत तारीख पर कर्मचारियों को वेतन का भुगतान, ठेकेदार भुगतान के बिल, चिकित्सा दावे और बकाया का 2-3 दिनों के भीतर भुगतान शामिल है।
एमसी ने विकास कार्य के लिए संशोधित अनुमानों (आरई) 2025-26 में पूंजी शीर्ष के तहत 245.00 करोड़ रूपये की मांग की थी। सहायता अनुदान की अनुपस्थिति के बावजूद, आयुक्त के प्रयासों ने उपलब्ध निधियों के प्रबंधन में यह सुनिश्चित किया कि निगम के वित्तीय दायित्व बिना किसी रुकावट के पूरे किए गए प्रशासन भी निगम आयुक्त अमित कुमार की मेहनत को देखते हुए उन्होंने हर संभव सहायता और अधिक फंड की देने की बात कही है जिस किसी तरह का आम जन को परेशानी का सामना ना करना पड़े।