चण्डीगढ़ : पंजाब के मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल ने राज्य भर में हाल ही में आए बाढ़ों के मध्यनजर फसलों के हुये नुकसान संबधी राहत के बारे में मौजूदा नियमों में प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को निजी दखल देकर संंशोधन की मांग की है व फसल के पूरी तरह नष्ट होने पर प्रति एकड कम से कम 20 हजार रूपये राहत देने की मांग की है। स. बादल ने शीघ्र उच्च स्तरीय केन्द्रीय टीम को बाढ़ के कारण हुये नुकसान का अनुमान लगाने के लिए पंजाब भेजने और बाढ़ पीडि़तों के पुर्नावास और हुये नुकसान के लिए विशेष पैकेज देने की मांग की है। उन्होने इस संबधी कार्य युद्ध स्तर पर करने के लिए कहा है।
प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में स. बादल ने उनको कृषि और राष्ट्रीय आपदा प्रंबधन अथारटी (एन डी एम ए)की केन्द्रीय टीम पंजाब भेजने के लिए जोर डाला है ताकि फसलों के नुकसान और राज्य में मौजूदा ड्रेन बुनियादी ढंाचे की स्थिति का पता लगाया जा सके। मुख्यमंत्री ने ऐसा ही पत्र केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार और केन्द्रीय गृह मंत्री श्री सुशील कुमार शिंदे को भी लिखा है।
स. बादल ने प्रधानमंत्री को अवगत करवाया कि 15 अगस्त के बाद तीन चार दिन इस क्षेत्र में पड़ी लगातार वर्षा के कारण भारी नुकसान हुआ है । यह केवल भाखड़ा , रणजीत सागर और पौंग डैम से पानी छोडऩे के कारण ही नही हुआ बल्कि बहुत सी ड्रेनें भी पानी से उछल गई और उनका पानी नदियों तक पहुंच नही सका जोकि पहले ही उफान पर थी। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि उन्होने पिछले कुछ दिनों दौरान बहुत ज्यादा प्रभावित क्षेेत्रों का दौरा किया है और लोगों के दर्दो को देखा है जिनके घर , फसले और पशुओं को नुकसान पहुुंचा है। मानवीय जीवन के अतिरिक्त सरकारी और भाईचारक मलकीयत वाले बुनियादी ढांचे का भी बड़ा नुकसान हुआ है।
मुख्यमंत्री ने डा. मनमोहन सिंह को बताया कि राज्य सरकार मुसीबत के मारे लोगों को इस संकट से बाहर निकालने के लिए कड़े प्रयत्न कर रही हेै और राहत कार्य शुरू किये हुये है। पंरतु राज्य आपदा प्रंबधन फंड के प्रयोग संबधी दिशा निर्देशों अधीन राहत के लिए दी गई आज्ञा पूरी तरह वाजिब नही है और न ही यह लोगों की सार्थक सहायता कर सकती है। उन्होने कहा कि इन नियमों अधीन सिंचाई वाले क्षेत्रों में फसलों के 100 प्रतिशत नुकसान होने पर प्रति हैक्टेयर 9 हजार रूपये राहत उपलब्ध करवाई जाती है। बाढ़ के इस मोैके खरीफ की फसल पूरी तरह तैयार हो गई थी और किसानों ने पहले ही फसलों को पालने के लिए बड़े खर्च किये हुये है जिनमें बीज,खादों,कीटनाशक,नदीननाशक दवाईयों,डीजल आदि शामिल है। अनुमान अनुसार इस क्षेत्र में फसल पर 25 हजार से तीस हजार रूपये प्रति एकड़ खर्चा आता है। इन स्थितियों में किसानों को 3600 रूपये प्रति एकड़ राहत देना उन से एक भददा मजाक है।
इसी प्रकार मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के यह भी ध्यान में लाया कि राज्य के बहुत से हिस्सों में हाल ही में वर्षा के कारण भारी तबाही हुई है जिससे किसानों और खेत मजदूरों पर मुसीबतों का पहाड़ टूटा है। उन्होने आगे लिखा कि जिस प्रकार आपको पता ही है कि पंजाब के इतिहासिक तौर पर सेम वाले और अन्य जिलो में ड्रेनें किसानों की जीवन रेखा है, रिवायती ड्रेन प्रणाली पिछले समय की देन है और अब इनको पुन डिजाईन करने और इनका स्तर उंचा करने की बड़ी आवश्यकता है किसानों की कपास,धान और चारे की फसलें पूरी तरह तबाह हो चुकी है। बहुत से गांवों में बाढ़ आई हुई हेै जिस कारण लोगों और पशुओं को राहत कैंपों में रखा गया है जहां उनको भोजन, पेयजल,दवाईयां, चारा आदि बांटा जा रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को आग्रह किया कि वह कृषि मंत्रालय और एन डी एम ए को शीघ्र अपनी उच्च स्तरीय केन्द्रीय टीम पंजाब भेजने के निर्देश दे ताकि वह स्थिति का जायजा ले सके ओैर राज्य के बाढ़ पीडि़तों को इस संकट से निकालने के लिए विशेष पैकेज जारी किया जा सके।
गौरतलब है कि भारत ने योजना आयोग के सदस्य डा.मिहीर शाह की अध्यक्षता अधीन एक टीम ने राज्य मेें सेम और ड्रेन समस्या का पहले अध्ययन किया था और केन्द्रीय बुनियादी ढांचे के फंडों का राह सुझाया था पंरतु इसके परिणामों का अभी भी इंतजार किया जा रहा है।
इसी दोैरान मुख्यमंत्री ने 14वें वितीय आयोग के चेयरमैन डा. वाई वी रेडडी को जिनी तौर पर अन्य सदस्यों के साथ शीघ्र अति शीघ्र राज्य के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने और यहां स्वयं आकर संकट में आए किसानों के बारे में सूचना प्राप्त करने के लिए आग्रह किया है ताकि जमीनी हकीकतों को केन्द्र के ध्यान में लाया जा सके और तबाह हुये बुनियादी ढांचे का स्तर उंचा उठाने और पुर्न निर्माण शुरू करने के लिए विशेष पैकेज जारी किया जा सके।
स. बादल ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के लिए दिल्ली से आने के लिए हैली कापटर उपलब्ध करवाने और अन्य सभी प्रंबध करने की पेशकश भी की है उन्होने कहा कि यदि यह शीघ्र संभव नही है तो मुख्यमंत्री ने यह दौरा 6 या सात सिंतबर 2013 को करने का आग्रह किया है।