चंडीगढ : पंजाब के मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल ने पंजाब की कृषि आर्थिकता और किसानों को मजबूत बनाने के लिए बैंकरों को कृषि विभिंनता कार्यक्रम सरगर्म भूमिका निभाने का आग्रह किया है।
आज स्थानीय शिवालिक होटल में राज्य स्तरीय बैंकरज कमेटी पंजाब की 125वीं बैठक को संबोधन करते हुये मुख्यमंत्री ने राज्य की क्रेडिट रैशो में वृद्धि करने की आवश्यकता पर जोर दिया उन्होने कहा कि इस समय राज्य की समूची क्रेडिट रैशो 80 प्रतिशत है जबकि ग्रामीण क्षेत्र में यह 63 प्रतिशत है। इसके विपरीत तमिलनाडू और आंध्राप्रदेश में यह क्रमश: 124 प्रतिशत और 112 प्रतिशत है।
स. बादल ने आगे कहा कि धान और गेहूं के फसली चक्र से किसानों को अलग करने और उनको लाभप्रद फसलों की कृषि करने के लिए प्रेरित करने हेतू सरकार ने कृषि विभिंनता कार्यक्रम आंरभ किया है और अगले पांच वर्षो दौरान धान अधीन 12 हजार हैक्टेयर रकबा निकालकर परिवर्तित फसलों अधीन लाया जाएगा उन्होने इस संबध में मक्की, बासमती, सोयाबनी फलों , सब्जियों की कृषि पर जोर दिया । इस संबध में उन्होन कृषि में क्रेडिट प्रवाह बढाने की आवश्यकता पर जोर दिया क्योकि सीधा कृषि अडवांस 20.08 प्रतिशत से घटकर 17.81प्रतिशत रह गया है। उन्होने कहा कि कृषि विभिंनता को प्रोत्साहन देने के लिए इस रूझान को विपरीत दिशा देने की जरूरत है। उन्होने कहा कि राज्य में पशुपालन के क्षेत्र में भी नये रूझान देखने को मिल रहे हेै और किसान डेयरी फार्मिंग,सुअर पालन, बकरी पालन आदि धंधे अपनाने के अतिरिक्त बागवानी की और भी बढ रहे है। उन्होने कहा कि इस रूझान को आगे ले जाने के लिए बैंकों को भी आगे आना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब ने देश क ो अन्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में बडी भूमिका निभाई है और इस समय भी देश के अन्न भंडार में 60 प्रतिशत से अधिक योगदान डाल रहा है। उन्होने कहा कि इसके वाबजूद पंजाब के किसान भारी कर्जे के बोझ के नीचे दबे हुये है और कृषि का धंधा अब लाभप्रद नही रहा। उन्होने कहा कि इसके परिणाम के रूप में गांवों के लोग शहरों की और जा रहे है इस लिए गांवो में अधिक से अधिक सुविधाए देने की जरूरत है। उन्होने कहा कि राज्य को दरपेश समस्याओं के वाबजूद इसने राज्य में शांति,सदभावना और आपसी भाईचारा कायम रखा है और यह इस समय पूरे देश में सबसे शांति वाला राज्य है। इस ने शिक्षा,बुनियादी ढांचे और कृषि में अग्रणीय स्थान प्राप्त कर लिया है। पंरतु इसकी पुरानी शान बहाल करने के लिए अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है।
ग्रामीण विकास ओर दबे कुचले लोगो के उत्थान करने पर जोर देते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के लिए गांव महत्वपूर्ण है और लोगों को गांवों में सभी सुविधाए देने के प्रयत्न किये जा रहे है। उन्होने बैंकों को क्र ेडिट बढाने पर जोर दिया । उन्होने इस संबध में महिला लाभपात्रियों और कमजोर वर्गो पर विशेष जोर देने के लिए कहा है। उन्होने कहा कि अनुसूचित जातियों के लाभपात्रियों का अडवांस वृद्धि दर कम हो रही है जो2011 में 44.4प्रतिशत थी वह जून 2013 में घटकर 13.75 प्रतिशत रह गई है। उन्होने कहा कि गांवों में अधिकतर सरकारी कालेज और स्कूल है इसलिए कमजोर वर्गो के बच्चों को कांवैट स्कूलों में पढ रहे बच्चों के बराबर लाने का यत्न करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि राज्य सरकार ने सरकारी स्कूलों में 80 प्रतिशत या इससे अधिक अंकप्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को सीनियर सैकेंडरी की पढाई के लिए तीस हजार तक वार्षिक छात्रवृति देने की योजना बनाई है ताकि होशियार और गरीब विद्यार्थी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर सके। उन्होने शिक्षा के स्तर को उंचा उठाने और सभी को शिक्षा उपलब्ध करवाने के लिए बैंको को भी अपने ढंग से सहयोग करने की अपील की। उन्होने कहा कि कमजोर वर्गो का जीवनस्तर उंचा उठाने के लिए उन्होने योजना आयोग के समक्ष भी यह मामला उठाया था और बैंको को भी इन वर्गो की सहायता के लिए आगे आना चाहिए।उन्होने कहा कि ग्रामीण स्वै रोजगार प्रशिक्षण के लिए थोडे थोडे समय का प्रशिक्षण दिया जाता है और बैंको एकत्रित हो कर प्रतिभा विकास केन्द्र स्थापित करने के लिए कार्य करना चाहिए ताकि ग्रामीण प्रतिभा को उभरा जा सके।
ग्रामीण स्वेै रोजगार प्रशिक्षण इंस्टीच्यूट पर जोर देते हुये स. बादल ने बताया कि सरकार ने ग्रामीण स्वेै रोजगार प्रशिक्षण इंस्टीच्यूट स्थापित करने के लिए राज्य के बीस जिलों में प्रत्येक को आधा एकड से लेकर 1.25 एकड जमीन की पेशक श की है जिससे इस प्रकार की बीस संस्थाए सरकारी ईमारतों में कार्य करने लगेगी। दो जिलों के लिए जमीन की पहचान करके शीघ्र ही उनके हवाले कर दी जाएगी। उन्होने कहा कि इनमें कोर्स दो से 6 सप्ताह के होने की जगह लम्बी अवधि के होने चाहिए। ताकि प्रतिभा विकास के घेरे को और विशाल किया जाए। उन्होने कहा कि कुछ स्थानों पर मुझे सीएलयू/ईडीसीज के संबध में दरपेश समस्याओं के बारे में बताया गया है और राज्य सरकार इन संस्थाओं को सीएलयू /ईडीसीज से छूट दे देगी।
स. बादल ने आगे कहा कि जून 2013 तक 28546 स्वै सहायता ग्रुप बने है और 19667 ग्रुपों को फाइनैंस किया गया है। अधिक से अधिक स्वै सहायता ग्रुप स्थापित करके और इनको फाइनैंस करके उच्च स्तर पर रोजगार पेैदा किया जा सकता है और ऐसे ग्रुपों की पहचान करने के लिए डिप्टी कमीशनर सहायता प्रदान कर सकते है।
स. बादल ने आगे कहा कि पंजाब ने विभिंन क्षेत्रों में शेष राज्यों से अधिक योगदान डाला है इसने देश की स्वंतत्रता में 80 प्रतिशत कुर्बानियां की है। इस समय भी राज्य के जवान और अधिकारी देश की सीमाओं की रक्षा करने के लिए अपनी जान हथेली पर रख कर बैठे है। भारत पाक वितरण दौरान भी पंजाब को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। अन्न सुरक्षा को यकीनी बनाने के लिए यह अभी भी अनाज का केन्द्रीय भंडार में 60 प्रतिशत योगदान डाल रहा है। इन सभी बातों के वाबजूद राज्य को और उन्नति के लिए अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है जिसके लिए बैंकों को आगे आना चाहिए और गांवों में ब्रांचे खोलने के लिए पंचायतों से सहयोग लेना चाहिए।
इस पहले पंजाब नेशनल बैंक के प्रंबधकीय निदेशक राकेश सेठी ने अपने भाषण में कहा कि पंजाब देश के अन्न भंडार में बडा योगदान डाल रहा है। उन्होने राज्य में प्रतिभा विकास पर जोर दिया और बैंको द्वारा राज्य को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिलाया ।
आर बी आई चंडीगढ के रिजनल डायरैक्टर एम के सिंह ने अपने भाषण दौरान कहा कि पिछले 18 महीनों दौरान पंजाब में वार्षिक क्र ेडिट प्लान की प्राप्ति बेहतर रही है। राज्य ने प्राथमिक क्षेत्र में अच्छी भूमिका निभाई है पंरतु अभी भी बहुत कुछ करने की जरूरत है। इससे पहले पीएनबी के फील्ड जनरल मैनेजर हरपाल सिंह ने अपने स्वागती भाषण दौरान मुख्यमंत्री का समारोह में आने के लिए धन्यवाद किया और राज्य द्वारा की गई प्राप्तियों का जिक्र किया इसी दौरान नाबार्ड के जनरल मैनेजर राकेश गुप्ता ने भी संबोधन किया इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव एस के संधू, सचिव खर्चा जसपाल सिंह, डायरैक्टर कम सचिव उद्योग एवं वाणिज्य विकास प्रताप सिंह, रजिस्ट्रार सहकारिता ए एस मिगलानी और पंजाब सरकार के अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।