गोद लिए गए गाँव खुड्डा जस्सू में स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण पर जागरूकता अभियान
चंडीगढ़, 28 सितंबर, 2025 – पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज फॉर गर्ल्स, सेक्टर 11, चंडीगढ़ ने "स्वस्थ युवा, स्वस्थ राष्ट्र: शरीर, मन और समुदाय के लिए पोषण" विषय पर 7 दिवसीय राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) शिविर शुरू किया है। यह शिविर 150 एनएसएस स्वयंसेवकों की ऊर्जा को एक साथ लाता है जो छात्रों की शिक्षा को सामुदायिक सेवा के साथ जोड़ने वाली गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
इस शिविर की एक विशिष्ट विशेषता गोद लिए गए गाँव खुड्डा जस्सू तक इसकी पहुँच है, जहाँ छात्र ग्रामीणों को उन मुद्दों पर शिक्षित कर रहे हैं जो उनके दैनिक जीवन को सीधे प्रभावित करते हैं। मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, संतुलित आहार के महत्व, योग और ध्यान के माध्यम से तनाव प्रबंधन और समग्र कल्याण में आध्यात्मिकता की भूमिका पर विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य शिक्षा के साथ-साथ, स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों को स्थायी प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु स्वच्छता अभियान, अपशिष्ट प्रबंधन जागरूकता और वृक्षारोपण अभियान भी शुरू किए हैं। ये प्रयास गाँव के पर्यावरण में प्रत्यक्ष परिवर्तन ला रहे हैं और निवासियों में भागीदारी और गौरव की भावना पैदा कर रहे हैं।
ग्रामीण उत्साहजनक प्रतिक्रिया दिखा रहे हैं, संवादात्मक सत्रों में भाग ले रहे हैं और अपने आसपास के वातावरण को स्वच्छ और हरा-भरा रखने में छात्रों के साथ हाथ मिला रहे हैं। सहभागी दृष्टिकोण अपनाकर, शिविर यह सुनिश्चित कर रहा है कि "शरीर, मन और समुदाय के लिए पोषण" का संदेश गाँव के युवाओं और बुजुर्गों दोनों तक पहुँचे, जिससे यह पहल और अधिक प्रभावशाली हो रही है।
यह शिविर प्रधानाचार्य डॉ. रमा अरोड़ा के गतिशील नेतृत्व में, एनएसएस समन्वयक डॉ. ध्रक्षयानी और एनएसएस कार्यक्रम अधिकारियों की टीम के सक्रिय सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। उनका उद्देश्य कक्षा में सीखने को वास्तविक दुनिया के अनुभवों के साथ जोड़ना है, जहाँ छात्र न केवल सामाजिक उत्तरदायित्व से परिचित होंगे, बल्कि जमीनी स्तर पर राष्ट्र निर्माण में भी सार्थक योगदान देंगे।
यह पहल इस बात का एक सशक्त उदाहरण है कि कैसे एनएसएस युवाओं को ज़िम्मेदार नागरिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ।
इस शिविर के माध्यम से, खुड्डा जस्सू न केवल तत्काल जागरूकता गतिविधियों से लाभान्वित हो रहा है, बल्कि दीर्घकालिक स्थायी स्वास्थ्य और पर्यावरणीय प्रथाओं की ओर भी बढ़ रहा है।