चंडीगढ - केन्द्र सरकार सदैव ही वोटों की राजनीति करती रही है जबकि लोगों के कल्याण की योजनाओं को लागू करने में अकाली भाजपा सरकार सदैव अग्रणीय भूमिका अदा करती आ रही है। कैन्द्रीय योजना आयोग द्वारा किया गया दावा कि देश में गरीबों की संख्या घट कर 22 प्रतिशत रह गई है सरासर तथ्यों के विपरीत और राजनीतिक चाल है। जिसका मुख्य उदेश्य केवल और केवल लोक सभा चुनावों में कांग्रेस को लाभ पहुंचाना है। इतिहास गवाह है कि कांग्रेस के राज्य में गरीबी ना नही बल्कि गरीबों का खात्मा होता रहा है। इन बातों का प्रगटावा मुख्य संसदीय सचिव सिंचाई और शिअद के एस सी विंग के मीत प्रधान स. सोहन सिंह ठंडल द्वारा प्रैस के नाम जारी बयान में किया गया है ।
उन्होने कहा कि केन्द्र द्वारा पेश किया किया गया अन्न सुरक्षा बिल भी राजनीतिक उदेश्य की पूर्ति के लिए पंजाब सरकार द्वारा चलाई जारही आटा दाल स्कीम की कार्बन कापी है। उन्होने कहा कि अन्न सुरक्षा बिल का खाका इतना कमजोर और दिशाहीन है कि इससे देश की गरीब जनसंख्या का एक बडा हिस्सा इसके अधीन नही आता जबकि जिन गरीब लोगों को महीने में पांच किलो अनाज देने का दावाकिया जा रहा है वह वास्तव में गरीब लोगों का मजाक उडाने की बात ही है। केन्द्र सरकार को लोक हितों की योजनाए बनाते समय पंजाब सरकार से नेतृत्व लेना चाहिए। केन्द्र सरकार को अपनी अन्न सुरक्षा स्कीम का नाम स. प्रकाश सिंह बादल अन्न सुरक्षा स्कीम ही रख देना चाहिए क्योकि यह केवल और केवल पंजाब सरकार की आटा दाल स्कीम से प्रभावित हो कर बनाई गई स्क्ीम है।
स. ठंडल ने कहा कि कांग्रेस सदा ही गरीबों की भावनाओं से खिलबाड करती रही है उन्होने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह हल्फनामा दिया था कि शहरी क्षेत्र में रहने वाला कोई भी व्यक्ति यदि दिन में 32 रूपये खर्च करता है और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाला व्यक्ति 26 रूपये खर्च करता है तो वह गरीब नही हो सकता और ऐसा व्यक्ति कोई भीसरकारी कल्याण कारी योजना अधीन सहायता लेने का हक दार नही उन्होने कहा कि अब केन्द्र सरकार ने एक गरीब व्यक्ति को महीने में 5 किलो अनाज देने का वायदा करके एक बार फिर गरीबों का मजाक उडाया है। उन्होने कहा कि हम यह मांग करते है कि पहले यूपीए की चेयरपरसन सोनिया गांधी 5 किलो अनाज में एक महीने गुजारा करके दिखाए उसके बाद हम गरीबों के लिए महीने का 5 किलो अनाज स्वीकार कर लेगें।
उन्होने कहा कि कांग्रेस की अध्यक्षता वाली यूपीए सरकार केवल वोटों की राजनीति के तहत ही देश के गरीब लोगों की भावनाओं से खिलवाड करती रही है। उन्होने कहा कि जब देशमें आम चुनावों को एक वर्ष से कम समय रह गया उस समय यह राजनीतिक दावपेंच खेल कर यूपीए की सरकार ने गरीबों की वोटों हासिल करने के लिए एक भददी चाल चली है।