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फोर्टिस अस्पताल मोहाली में ‘डीटीएमएस’ थेरेपी की शुरुआत

Updated on Friday, July 18, 2025 07:44 AM IST

जटिल मानसिक रोगों के लिए उन्नत ब्रेन स्टिमुलेशन तकनीक

डिप्रेशन, ओसीडी, पीटीएसडी जैसी बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बनी डीटीएमएस थेरेपी

चंडीगढ़, 17 जुलाई 2025: ट्राइसिटी क्षेत्र में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल के क्षेत्र में एक बड़ी प्रगति करते हुए, फोर्टिस अस्पताल मोहाली ने डीप ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (डीटीएमएस) तकनीक की शुरुआत की है। यह एक नॉन-इनवेसिव और एफडीए-एप्रूव्ड ब्रेन स्टिमुलेशन थेरेपी है, जो उन मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है जो पारंपरिक दवाइयों या मनोचिकित्सा से लाभ नहीं ले पाए हैं। चार महीने पहले शुरू की गई इस थेरेपी के माध्यम से अब तक 15 ऑब्सेसिव-कॉम्पलसिव डिसऑर्डर (ओसीडी) मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज किया जा चुका है। डीटीएमएस को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह मस्तिष्क के उन गहरे हिस्सों तक पहुंच सके जहाँ रेपेटिटिव ट्रांसक्रेनियल मैग्नेटिक स्टिमुलेशन (आरटीएमएस) नहीं पहुंच पाती, जिससे यह कुछ कठिन मानसिक स्थितियों में अधिक प्रभावी विकल्प बनती है।

 

एक प्रेस वार्ता के दौरान, डॉ. हरदीप सिंह, एडिशनल डायरेक्टर - साइकेट्री, फोर्टिस मोहाली ने डीटीएमएस से हुए सफल परिणाम साझा किए। एक 40 वर्षीय महिला, जो लगभग 16 वर्षों से गंभीर ओब्सेसिव-कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) की चपेट में थी, संक्रमण के अत्यधिक भय से जूझ रही थी। वह हर दिन कई-कई घंटे थकाने वाले सफाई के अनुष्ठानों में व्यस्त रहती थी, जिससे वह शारीरिक रूप से कमजोर हो चुकी थी और लगभग अपने घर तक ही सीमित हो गई थी। वर्षों तक कई प्रमुख चिकित्सा संस्थानों से उपचार लेने के बावजूद, उनके लक्षण अत्यंत गंभीर बने रहे, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता पर गंभीर प्रभाव पड़ा। उन्हें ओसीडी से संबंधित मस्तिष्क के गहरे हिस्सों को लक्षित करने के लिए डीटीएमएस थेरेपी पर रखा गया।

 

डॉ. हरदीप सिंह ने बताया, “सिर्फ छह सप्ताह की डीटीएमएस थेरेपी के बाद उसकी स्थिति में जबरदस्त सुधार हुआ। उसका येल-ब्राउन ऑब्सेसिव-कंपल्सिव स्केल (वाई- बीओसीएस) स्कोर, जो पहले 32 था (अत्यधिक गंभीर ओसीडी को दर्शाता है), घटकर 13 हो गया जो कि हल्के ओसीडी को दर्शाता है। वह अब अपने जीवन पर नियंत्रण वापस पा रही है और उसकी दिनचर्या सामान्य हो गई है। डीटीएमएस मानसिक रोगों के इलाज के तौर-तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। यह एक सटीक, सुरक्षित और दीर्घकालिक राहत देने वाली थेरेपी है, जिसमें पारंपरिक दवाओं जैसे साइड इफेक्ट नहीं होते।”

 

डीटीएमएस तकनीक विशेष चुने हुए मस्तिष्क क्षेत्रों में मैग्नेटिक पल्स भेजती है, जिससे मानसिक और तंत्रिका संबंधी रोगों में सुधार होता है। यह ओसीडी, पीटीएसडी, एंग्ज़ायटी, क्रॉनिक पेन, माइग्रेन और निकोटिन की लत जैसी समस्याओं के इलाज में बेहद कारगर सिद्ध हुई है। शोधकर्ता इसके उपयोग की संभावनाएं पार्किंसन डिज़ीज़, टूरेट सिंड्रोम और ऑटिज़्म जैसी स्थितियों में भी तलाश रहे हैं। आमतौर पर मरीजों को 4 से 6 सप्ताह तक 20–30 सेशन्स की आवश्यकता होती है। यह प्रक्रिया पूरी तरह से गैर-इनवेसिव है, मरीज पूरे समय जागरूक और बातचीत करने में सक्षम रहते हैं, और इसमें किसी एनेस्थीसिया की जरूरत नहीं होती।

 

डॉ. निशित सावल, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी, ने बताया, “डीटीएमएस पोस्ट-स्ट्रोक मरीजों के लिए भी लाभदायक है, खासकर एफेज़िया और पोस्ट-स्ट्रोक पुनर्वास के मामलों में। एफेज़िया एक भाषा विकार है जो बोलने, समझने, पढ़ने और लिखने की क्षमता को प्रभावित करता है और यह आमतौर पर मस्तिष्क में भाषा से संबंधित हिस्सों को हुए नुकसान के कारण होता है, जैसे कि स्ट्रोक या सिर में चोट।” फोर्टिस मोहाली मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी उन्नत और प्रभावी तकनीकों को आम जनता तक पहुंचाने के अपने संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, और डीटीएमएस थेरेपी इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो मरीजों और उनके परिवारों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरी है।

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