चंडीगढ़: पार्क ग्रीशियन हॉस्पिटल, मोहाली में पांच हृदय रोगियों को क्रॉनिक टोटल ऑक्लूजन (सीटीओ) एंजियोप्लास्टी से नई ज़िंदगी मिली। इनमें वे मरीज भी शामिल थे जिन्हें बायपास सर्जरी के लिए अनुपयुक्त या उच्च जोखिम वाला माना गया था।
ऐसा ही एक मामला 50 वर्षीय पुरुष का था जो ट्रिपल-वेसल कोरोनरी आर्टरी डिजीज से पीड़ित थे। उन्हें चलने-फिरने पर सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ और थकान की शिकायत थी, जिससे उनकी दिनचर्या काफी प्रभावित हो रही थी।
मरीज ने पहले भी डॉक्टरों से सलाह ली थी और उन्हें कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग कराने की सलाह दी गई थी। हालांकि, उनके गंभीर ब्रोंकियल अस्थमा के कारण, उन्हें लंबे समय तक वेंटिलेटर सपोर्ट और वेंटिलेटर से हटाने में होने वाली देरी की आशंकाओं के चलते सर्जरी के लिए एक उच्च जोखिम वाला मरीज माना गया था।
एसोसिएट डायरेक्टर-कार्डियोलॉजी विभाग, डॉ. संकल्प शर्मा ने बताया कि मरीज की दो चरणों में एंजियोप्लास्टी की गई, जिसमें सफल क्रॉनिक टोटल ऑक्लुजन एंजियोप्लास्टी भी शामिल थी। इसके परिणामस्वरूप बिना बायपास सर्जरी के ही पूरी कोरोनरी रिवैस्कुलराइजेशन हो गई।
डॉ. शर्मा ने बताया कि सफल सीटीओ एंजियोप्लास्टी परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन से सर्जरी के लिए उच्च जोखिम वाले उन चुनिंदा मरीजों में बाईपास सर्जरी का एक बेहतर विकल्प मिलता है। हालांकि, उन्होंने यह भी जानकारी दी कि यह हर मरीज में कोरोनरी आर्टरी बाईपास ग्राफ्टिंग का विकल्प नहीं है, क्योंकि इलाज के फैसले हर मरीज की स्थिति के अनुसार अलग-अलग व्यक्तिगत तौर पर लिए जाने चाहिए।