चंडीगढ़, 14 जुलाई 2025: पंजाब की सामाजिक और आध्यात्मिक चेतना को स्वर देते हुए, भारतीय जनता पार्टी पंजाब के प्रदेश महामंत्री डॉ. जगमोहन सिंह राजू ने सोमवार को पंजाब विधानसभा के बाहर एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन का नेतृत्व किया। इस प्रदर्शन में नागरिकों, धार्मिक नेताओं, छात्र संगठनों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी देखने को मिली। सभी की दो प्रमुख मांगें थीं — पंजाब को नशा मुक्त बनाया जाए और अमृतसर को हरिद्वार, अयोध्या व द्वारका की तरह आधिकारिक तौर पर ‘पवित्र शहर’ घोषित किया जाए।
डॉ. राजू ने हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में राज्य सरकार द्वारा दायर उस हलफनामे की कड़ी आलोचना की जिसमें इन मांगों को सिरे से खारिज कर दिया गया। यही हलफनामा इस प्रदर्शन का मुख्य कारण बना।
प्रदर्शन से पहले डॉ. राजू ने पंजाब विधानसभा अध्यक्ष को एक विस्तृत पत्र लिखते हुए 10–11 जुलाई को हुई विशेष सत्र की कार्यवाही पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने इस सत्र को “थिएटर ऑफ द एब्सर्ड” करार देते हुए कहा कि विधानसभा में पंजाब की गंभीर समस्याओं — विशेषकर नशाखोरी और बेअदबी — पर गंभीर चर्चा के बजाय हास्य, मखौल और सड़कछाप शैली में व्यवहार किया गया।
संविधान के अनुच्छेद 47 का हवाला देते हुए डॉ. राजू ने सरकार को याद दिलाया कि वह नशीले पदार्थों पर प्रतिबंध लगाने के लिए बाध्य है । उन्होंने कहा कि पंजाब का ग्रामीण समाज आज नशे के कारण बर्बादी की कगार पर है, और सरकार इस दिशा में पूरी तरह विफल रही है।
डॉ. राजू ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार अमृतसर स्थित धार्मिक स्थलों — श्री हरमंदिर साहिब, दुर्गियाना मंदिर और राम तीर्थ मंदिर के आसपास शराब व मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने से लगातार इनकार कर रही है।
प्रदर्शन के दौरान, डॉ. राजू और उनके समर्थकों ने सरकार को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें पूरे अमृतसर में ऐतिहासिक गुरुद्वारों और मंदिरों के 200 मीटर के दायरे में शराब और तंबाकू की सभी दुकानों को स्थायी रूप से बंद करने की मांग की गई। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने औपचारिक रूप से इस आंदोलन को अपना समर्थन दिया है।
मीडिया से बात करते हुए डॉ. राजू ने एक सीधा सवाल रखा “जब हरिद्वार, अयोध्या और द्वारका को पवित्र शहर घोषित किया जा सकता है, तो पंजाब की आध्यात्मिक आत्मा — अमृतसर को क्यों नहीं?”
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इन जायज और संवैधानिक मांगों को नजरअंदाज किया, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप लेगा। आने वाले दिनों में धार्मिक यात्राएं, जन-जागरण अभियान और राष्ट्रीय नेतृत्व से नीति-स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की जाएगी।
प्रदर्शन के शांतिपूर्ण समापन के बाद, डॉ. राजू को पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया जिसे लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन माना जा रहा है। सामाजिक संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और आम नागरिकों में इस कार्रवाई को लेकर गहरा आक्रोश है।