चंडीगढ - पंजाब सरकार द्वारा शिक्षा विभाग में अपनी नौकरी छोड़ कर विदेशों में जा बसे सैंकड़ों कर्मचारीयों की सेवाओं को समाप्त किया गया है। इस बात की जानकारी देते हुए आज यहां पंजाब के शिक्षा मंत्री स.सिकन्दर सिंह मलूका ने बताया कि कई अध्यापक तो गत दस वर्षो से भी अधिक समय से लगातार अनुपस्थित चल रहे हैं। इन अध्यापकों की यह अनुपस्थिति स्कूलों में पढ़ते बच्चों की शिक्षा पर बुरा प्रभाव डालती है। समय समय पर इन अध्यपाकों के विरूद्व कार्रवाई करने की योजनाएं बनती रही थीं परन्तु यह पहली बार हुआ है कि ऐसे अनुपस्थिति अध्यापकों की सेवाएं समाप्त करने के लिए एक योजनाबद्व कार्ययोजना बनाकर कार्रवाई की गई है। इस कार्रवाई अधीन गत दो माह के समय में लगभग 206 अनुपस्थिति अध्यापकों की सेवाएं शिक्षा विभाग द्वारा समाप्त कर दी गई हैं।
उन्होंने आगे बताया कि इन 206 कर्मचारियों में से 166 मास्टर काडर, 25 सर्व शिक्षा अभियान के अध्यापक, 6 कम्प्यूटर अध्यापक और 9 नान टीचिंग कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गई है।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस मंतव्य के लिए डी.जी.एस.ई. के कार्यालय में एक अलग विंग स्थापित किया गया है जोकि लम्बे समय से अनुपस्थित अध्यापकों के विरूद्व हो रही कार्रवाई की निगरानी करता है। इस विभाग के पास अब तक लगभग 1100 लम्बे समय से अनुपस्थित अध्यापकों की जानकारी पहुंची है। जिनके विरूद्व विभिन्न स्तर के अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जानी है। यह कार्रवाही शिक्षा सचिव, डी.जी.एस.ई.,डी.पी.आई सीनियर सैकंडरी, निदेशक प्रशासन, डी.पी.आई.एलीमैंटरी शिक्षा और जिला शिक्षा अधिकारियों के स्तर पर की जानी है।
इस संबंधी जानकारी देते हुए डी.जी.एस.ई. स. काहन सिंह पन्नुू आई.ए.एस. ने बताया कि लम्बे समय सेे अनुपस्थित शिक्षा विभाग के अध्यापकों और कर्मचारियों विरूद्व कार्रवाई पूरी गंभीरता से की जा रही है और 31 मार्च तक ऐसे समूह अध्यापक और कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त करने के पैसले ले लिए जाएंगे। उन्होंने आगे बताया कि नई हिदायतों अनुसार यदि कोई कर्मचारी अध्यापक विदेश में छुटटी लेकर जाता है तो उस कर्मचारी अध्यापक से हलपिया ब्यान लिया जाता है कि यदि वह अनाधिक्त छुटटी से विदेश में रहता है तो उसकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएं।
डी.जी.एस.ई. ने आगे बताया कि विदेशों में अनाधिक्त छुटिटयों में गए कर्मचारियों विरूद्व कार्रवाई करने में विभाग कोई नरमी नहीं बरतेगा ताकि इन स्कूलों में पढ़ते विद्यार्थियों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ ना कर सके ।