चण्डीगढ़ : पंजाब सरकार द्वारा वर्ष 2013-14 दौरान पांच सौ सौर ऊर्जा सिंचाई पम्पों के लिए अपने स्रोतों से एक लाख रूपये प्रति पम्प सबसिडी प्रदान करने का एक उत्साही प्रोजैक्ट आरम्भ किया जा रहा है और इस प्रोजैक्ट के लिए पांच करोड़ रूपये के विशेष फंड पहले ही मंजूर कर दिये गये हैं।
यह जानकारी देेते हुए पंजाब के गैर रिवायती ऊर्जा मंत्री स. बिक्रम सिंह मजीठिया ने बताया कि इस फैसले का दो तरफा उद्धेश्य एक तरफ जहां रिन्युएबल और प्रदूषण रहित ऊर्जा के प्रयोग को प्रोत्साहित करना है वहीं दूसरी ओर कृषि विविधता अपनाने वाले किसानों को आर्थिक लाभ प्रदान करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सौर ऊर्जा सिंचाई पम्पों के लिए राज्य सरकार की यह सबसिडी देने के लिए कृषि विविधता के लिए कार्य करने वाले किसानों क ो विशेष प्राथमिकता दी जायेगी।
उन्होंने बताया कि मौजूदा समय एक सौर ऊर्जा सिंचाई पम्प पर ढाई लाख रूपये का खर्चा होता है और केन्द्र सरकार द्वारा इसके लिए केवल तीस प्रतिश्त सबसिडी ही प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा कि अब राज्य सरकार द्वारा अपने स्तर पर चालीस प्रतिशत और अतिरिक्त सबसिडी जोकि एक लाख रूपये प्रति पम्प बनती है की व्यवस्था किये जाने से लाभपात्री को केवल 75000 रूपये ही अपने पास से खर्चने पड़ेंगें। स. मजीठिया ने विस्तृत में बताया कि वर्ष 2000 -01 और 2003-04 दौरान दो हारस पावर क्षमता वाले 1850 सोलर सिंचाई पम्प राज्य में लगाये गये थे। उन्होंने बताया कि उस समय इन पम्पों के लिए केन्द्र द्वारा अस्सी प्रतिशत और राज्य सरकार द्वारा दस प्रतिशत सबसिडी दिये जाने स्वरूप किसानों को बेहद मामूली राशि ही खर्च करनी पड़ती थी। उन्होंने आगे बताया कि वर्ष 2003-04 पश्चात यह स्कीम उचित ढंग से नहीं लागू की जा सकी । क्योंकि केन्द्र सरकार ने किसानों की अनदेखी करते हुए वर्ष 2010-11 में इन पम्पों पर केन्द्रीय सबसिडी को प्रति पम्प पच्चास हजार रूपये पर ही सीमित कर दिया। जिस कारण लाभपात्री हिस्सा डालना एक आम किसान के वित्त से बाहर हो गया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा केन्द्र सरकार को लगातार यह सबसिडी 70 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए प्रार्थनाएं की गई हैं। किन्तु पंजाब के मेहनतकस किसानों की अनदेखी आज तक निरन्तर जारी है। उन्होंने कहा कि किसान भाईचारे की आर्थिकता को उत्साहित करने के लिए पंजाब के मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल ने प्रदूषण मुक्त स्वच्छ ऊर्जा के प्रोत्साहन के लिए राज्य सरकार के स्रोतों से इन पम्पों के लिए चालीस प्रतिशत सबसिडी जो प्रति पम्प एक लाख रूपये बनती है, की व्यवस्था करके दरिया दिली दिखाई है।
उन्होंने मुख्यमंत्री का इस फैसले के लिए सुहृदय धन्यवाद करते हुए पंजाब के किसानों को राज्य में प्रदूषण मुक्त ऊर्जा के प्रोत्साहन के प्रयासों में अपना बड़ा योगदान डालने का आहवान किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में भू-जल के स्तर में चिन्ता जनक कमी के मध्यनजर हमारे लिए यह अनिवार्य बन गया है कि धान की फसल के नीचे सिंचाई योग्य बड़े रकबे को गन्ना, कपास,नरमा, मक्की, सोयाबीन, तेल बीजों, दालों के साथ साथ फलों और सब्जियों की परिवर्तित फसलों अधीन लाया जाये।