चंडीगढ: पंजाब के मुख्यमंत्री स. प्रकाश सिंह बादल ने आज प्रधानमंत्री डा मनमोहन सिंह को कृषि वाली जमीन पर संपति टैक्स लगाने से पैदा होने वाली गंभीर स्थिति और खतरों से सतर्क करते हुये कहा कि यह टैक्स लगाने के देश मेें गंभीर हफरातफरी और अराजकता फैल जाएगी और देश एक चिंता जनक आर्थिक संकट की आग की लपटों में घिर जाएगा ।
स. बादल ने इस विरोधी फैसले के संबध में प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखकर उनको इस मामले में फौरी तौर पर निजी और असरदायक दखल देने की मांग की ताकि कृषि योगय जमीन को संपति कर के घेरे में ना लाया जाए।
स. बादल ने ऐसी ही अपील केन्द्रीय वित मंत्री श्री पी चिदम्बरम व अन्य क ेन्द्रीय मंत्रियों जो इस मामले के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुडे हुये है को भी कि इस प्रकार मुख्यमंत्री ने कृषि जमीनो ंपर लगाए गये संपति टैक्स का कडा विरोध करने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर राजसी और सामाजिक सर्व सम्मति कायम करने का निमंत्रण भी दिया।
स. बादल ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय पार्टियों के नेताओं , इन पार्टियों के संसद सदस्यों को अलग अलग तौर पर पत्र लिखकर संसद के अंदर और बाहर पूरी तरह इस फैसले का विरोध करने के लिए कहा।
मुख्यमंत्री ने देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी अलग रूप से पत्र लिखते हुये उनको इस टैक्स का विरोध करने के लिए कहा क्योकि पहले से ही संकट से जूझ रहे किसान और कृषि पर प्रत्याक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर अन्य लोगों के लिए यह निर्णय फांसी का फंदा है। यह फैसला उच्च स्तर पर आर्थिक तबाही , कृषि मजदूरों , तजारत और औद्योगिक इकाइ्रयों के अतिरिक्त कृषि धंधे के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुडे लोगों में अराजकता और बेचैनी पेैदा करने के लिए जिम्मेवार होगा।
इस फैसले विरूद्ध स. बादल द्वारा उठाए हुये बेमिसाल ओैर ठोस कदम पर प्रकाश डालते हुये उनके राष्ट्रीय मामले सलाहकार श्री हरचरण बैंस ने आज बाद दोपहर पत्रकारों से बातचीत करते हुये कहा कि स. बादल के सुहृदय यत्नों को देश भर में राजनीतिक स्तर पर उपर उठकर भव्य प्रोत्साहन मिला है। श्री बैंस ने कहा कि जिन नेताओ के साथ स. बादल द्वारा संपर्क किया गया उनको भी कृषि पर लगाए संपति कर का गहरा एहसास है। इससे न केवल कृषि बल्कि उच्च स्तर पर आर्थिक गति विधियों को गहरी चोट पहुंचेगी स. बादल ने राजनीतिक पार्टियों और नेताओं को बताया कि लघु और मध्यम व्यापारियों जो कि कृषि उत्पाद के प्रचून जैसे आटा,दाल,सब्जियों और कृषि औजारों के निर्माता है पर भी बहुत बुरा प्रभाव पडेगा। श्री बैंस ने मुख्यमंत्री ने इस व्यापक हमले की तुलना वर्ष 1975 में देश में श्रीमती इंदिरा गंाधी द्वारा एमरजैंसी खिलाफ चलाई गई लहर से की और कहा की यह मामला भी उतना ही गंभीर है जितना की देश में आंतरिक एमरजैंसी लगाने से पेैदा हुई स्थिति का संकट था।
मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री जोकि शिअद के प्रधान भी है इस मामले पर प्रधानमंत्री के साथ निजी मुलाकात के लिए समय मांगा गया है जिसके बारे में अभी उनको कोई भरोसा नही दिया गया यह संभावना है कि इन नेताओं द्वारा 30 अप्रैल या 1 मई को इस मामले संबधी प्रधानमंत्री से मुलाकात की जा सकती है चाहे कोई भी तारीक अभी फाइनल नही की गई ।
प्रधानमंत्री को लिखे एक अलग पत्र में मुख्यमंत्री ने संपति कर लगाए जाने से पैदा होने वाले संभावी और मौजूदा खतरों से भी मुख्यमंत्री को अवगत करवाया कि किस प्रकार इस गैर तर्क संगत संपति कर से कृषि और सहायक आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित होगी। मुख्यमंत्री ने लिखा है कि कोई भी किसान कृषि करना नही चाहेगा क्येा िकयह पूर्ण रूप से लाभ रहित और नुकसान दायक धंधा बना जाएगा इस टैक्स से कृषि बंद हो जाएगी और अन्न भंडार खाली हो जाएगें स. बादल द्वारा इस मामले पर तीन चार दिनों दौरान देश के प्रसिद्ध राजनीतिक नेताओ के साथ बातचीत की गई है स. बादल ने कहा कि इस टैक्स को लागू करना बहुत ही गंभीर और खतरनाक कद म होगा उन्होने जिक्र किया कि संपति कर लगने से किसानो को तीस हजार से 70000 रूपये प्रति एकड वार्षिक टैक्स देना पडेगा जबकि किसानों की समूची आय भी इस टैक्स से कम होती है।
उन्होने कहा कि संपति टैक्स से संभावी तौर पर देश में अराजकता और निराशा का माहोैल पेैदा हो जाएगा उन्होने कहा कि भारत सरकार का कानून और व्यवस्था की स्थिति के मध्यनजर इस फैसले को पुन विचारना चाहिए क्योकि संपति टैक्स लागू होने के बाद उत्पन अराजकता नक्सली आदोलन को पुन उभार सकती है मुख्यमंत्री द्वारा भाजपा के कौमी प्रधान श्री राजनाथ सिंह , जनता दल यूनाइटिड के प्रधान और एन डी ए के कनवीनर श्री शरद पवार, समाजवादी पार्टी के प्रधान मुलायम सिंह यादव, जनता दल के प्रधान लालू प्रसाद यादव के अतिरिक्त अन्य सुवाई और कौमी राजनीतिक नेताओ के साथ मुलाकात किये जाने की संभावना है ताकि किसानों के मामले पर इन पार्टियों का समर्थन हासिल करके भारत सरकार पर संपति टैक्स को वापिस लेने का दवाब डाला जा सके ।
यह वर्णननीय है कि शिअद की कोर कमेटी द्वारा पार्टी प्रधान स. सुखबीर सिंह बादल की अध्यक्षता अधीन 25 अप्रैल को बुलाई गई हंगामी बैठक दौरान प्रस्ताव पास करके इस गंभीर मामले पर विचार करने के लिए तीन मई को विधान सभा का हंगामी अधिवेशन बुलाया गया है। श्री बैंस ने कहा कि कोर कमेटी द्वारा अकाली दल की सांझेदार पार्टी भाजपा के साथ मिलकर दो मई को राज्य भर में सुबह 11 बजे से 1 बजे तक जिला हैडक्वाटरों पर धरने देने का फैसला लिया गया है। पार्टी के सभी मंत्री , सीनियर नेता संसद सदस्य,विधायक ,जिला और स्कर्ल जत्थेदारों के अतिरिक्त शिअद समूह पार्टी पदाधिकारी हजारों की संख्या में वर्कर और किसानों द्वारा लगाए जाने वाले इन धरनों की अध्यक्षता करेगी।