दोनों पक्षकारों के बीच कुल 110 करोड़ रूपये से भी अधिक की राशि का निपटान हुआ
हरियाणा के 22 जिलों और 34 उपमंडलों में दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन
पंचकूला - हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा न्यायमूर्ति श्री अरुण पल्ली, न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय एवं कार्यकारी अध्यक्ष, हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में इस वर्ष की दूसरी राष्ट्रीय लोक अदालत 22 जिलों और 34 उपमंडलों में किया गया। इसमें सिविल, आपराधिक, वैवाहिक, बैंक वसूली, आदि से संबंधित कई तरह के मामले उठाए गए। इसमें एडीआर केंद्रों में कार्यरत स्थायी लोक अदालतों (सार्वजनिक उपयोगिता सेवाएं) के मामले भी शामिल हैं। लोक अदालत आयोजित करने का उद्देश्य वादकारियों को अपने विवादों को सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए एक मंच प्रदान करना है।
राष्ट्रीय लोक अदालत के समय न्यायमूर्ति अरुण पल्ली, न्यायाधीश, पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय एवं कार्यकारी अध्यक्ष, हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, सूर्य प्रताप सिंह, सदस्य सचिव, हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, अक्षदीप महाजन, संयुक्त सदस्य सचिव, हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, उच्च न्यायालय के अन्य अधिकारीगण तथा हालसा के अन्य सहयोगी कर्मचारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से लोक अदालतों की निगरानी की।
न्यायमूर्ति ने लोक अदालत पीठों के साथ-साथ पक्षकारों से भी बातचीत की और लोक अदालत पीठों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए न्यायमूर्ति श्री अरुण पल्ली ने राष्ट्रीय लोक अदालत के सफलतापूर्वक संचालन के लिए लोक अदालत पीठों को अपनी शुभकामनाएं दीं और उन्हें आज की राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक मामलों का निपटारा करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंनेे इस बात पर भी जोर दिया कि लोक अदालत बिना किसी अतिरिक्त लागत या शुल्क के पार्टियों पर बाध्यकारी मामलों के त्वरित और अंतिम सहमतिपूर्ण निपटान को सुनिश्चित करने के लिए एक प्रभावी वैकल्पिक विवाद समाधान पद्धति है। लोक अदालतें न केवल लंबित विवाद या पक्षकारों के बीच उत्पन्न होने वाले विवादों का निपटारा करती हैं, बल्कि यह सामाजिक सद्भाव भी सुनिश्चित करती हैं क्योंकि विवाद करने वाले पक्षकार अपनी पूर्ण संतुष्टि के साथ अपने मामलों को सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाते हैं और यह लोक अदालत बहुत ही कारगर साबित होती है।
लोक अदालत पीठों के प्रयासों से उन मामलों को पक्षों के बीच सौहार्दपूर्ण ढंग से सुलझाया गया जो लंबे समय से लंबित थे जिसमें सफल कहानियों के रूप में उदाहरण प्रस्तुत है।
(अ) झज्जर: एक मां और बेटे के बीच एक पुराना विवाद सुलझ गया और बेटा स्वेच्छा से रुपये देने पर सहमत हो गया। उनकी माँ को भरण-पोषण भत्ते के रूप में 12,000 रुपए प्रति माह मिलेंगे।
(ब) हिसार: पिछले चार वर्षों से लंबित एक तलाक याचिका में, युगल पक्ष के बीच वैवाहिक विवाद को लोक अदालत पीठ के व्यक्तिगत प्रयासों से सौहार्दपूर्ण ढंग से हल किया गया। याचिकाकर्ता ने तलाक की याचिका वापस ले ली और दोनों पक्ष मुकदमेबाजी को समाप्त करने के उद्देश्य से हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 बी के तहत याचिका दायर करने पर सहमत हुए।
(स) फरीदाबाद: एम0ऐ0सी0टी0 विवाद में, याचिकाकर्ता की विकलांगता का मौके पर ही ऑर्थोपेडिक सर्जन की मदद से पता लगाया गया, जिन्हें विशेषज्ञ की राय और सहायता के लिए एम0ऐ0सी0टी0 बेंच में नियुक्त किया गया था और मामले को सफलतापूर्वक हल किया गया ।
(द) चरखी दादरी: पिछले दो वर्षों से लंबित एक तलाक याचिका में, दंपति के बीच वैवाहिक विवाद और नाबालिग बच्चे की हिरासत का विवाद संबंधित पीठ के व्यक्तिगत प्रयासों और परामर्श के कारण सौहार्दपूर्ण ढंग से हल हो गया। चूंकि प्रतिवादी/पत्नी 20 लाख रुपये के लिए अड़ी हुई थी लेकिन पीठ के प्रयासों से मामला दो किस्तों में एकमुश्त निपटान के रूप में 15 लाख रुपये में सुलझ गया और नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा प्रतिवादी/पत्नी के पास रहेगी। याचिकाकर्ता ने तलाक की याचिका वापस ले ली और दोनों पक्ष मुकदमेबाजी को समाप्त करने के उद्देश्य से हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 बी0 के तहत याचिका दायर करने पर सहमत हुए।
(य) पानीपत: धारा 323, 325, 506 आईपीसी से संबंधित दो 60 वर्षीय भाइयों के बीच एक मामले में समझौता हो गया। कंपाउंडिंग के लिए एक आवेदन पर उनके अलग-अलग बयान दर्ज किए गए। इस प्रकार, आपराधिक मामला सुलझ गया और दोनों भाई कोर्ट में ही फिर से मिले और बेहतर भविष्य की उम्मीद करते हुए चले गए।
पूर्व मुकदमेबाजी और लंबित दोनों चरणों में कुल 256589 मामलों का निपटारा किया गया, जिससे पक्षकारों के बीच कुल 110 करोड़ रूपये से भी अधिक की राशि का निपटान हुआ।