पंचकूला 08 अक्तूबर- हरियाणा साहित्य और संस्कृति अकादमी (हरियाणा सरकार) द्वारा आज 08 अक्टूबर, 2026 को अकादमी भवन, सेक्टर-14, पंचकूला में पुआधी पंजाबी कवि दरबार का आयोजन किया। जिसमें जहाँ पुआधी क्षेत्र के जाने-माने कवि विद्वान शामिल हुए, वहीँ डॉ. अनुकंपा गर्ग, सदस्य महिला आयोग, हरियाणा, श्री गुरमीत सिंह रामसर, सदस्य हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी, लखविंदर सिंह ग्रेवाल, अध्यक्ष राजा अजीत सिंह मेमोरियल ट्रस्ट, कुरुक्षेत्र और श्री जैलदार सिंह हसमुख, अध्यक्ष पंजाबी साहित्य सभा, डेरा बस्सी ने सिरक्त की। इस कवि दरबार में विद्वानों ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। कवि दरबार में डा. रतन सिंह ढिल्लों, डा. सुदर्शन गासो, श्री बलवान औजला, डा. चरणजीत कौर, डा. जगपाल, प्रिंसीपल बृज भुषण शर्मा स. धर्म सिंह, निंदी ईसापुर वाला, गुरदास सिंह दास, श्री सतीश विद्रोही आदि कवियों ने अपनी पुआधी रचनाओं के माध्यम से अनूठा रंग जमाया।
इस कवि दरबार की विशेषता यह रही कि सभी कवियों ने अपनी रचनाओं के साथ-साथ अपने संबोधन भी विशुद्ध रूप से पुआधी बोली में प्रस्तुत किए। डा. रतन सिंह ढिल्लों ने अपनी पुआधी रचना ‘सब के गेल सब ते दूर, थम बताओ कौन सी हूर/जिब हारे तो अस्पताल, जिब जीते तब चढ़े सरूर’ के माध्यम से श्रोताओं को जीवन की कड़वी सच्चाईयों से रू-ब-रू कराया। स. जैलदार सिंह हसमुख ने अपनी कविता ‘इब ना पिछै मुड़ कै देखियो तूर पई गल पुआधी दी’ के माध्यम से पुआधी की विकाससीलता का वर्णन किया।
निंदी ईसापुरवाले ने अपने काव्य गीत ‘गों जद का बन गया शहर, व्रत रहा कहर, कुदरत वी मुंह सा मोड़ गई’ के माध्यम से गांवों के लोगों के शहरों की ओर पलायन का सुंदर वर्णन किया। धर्म सिंह भांखरपुर ने श्री आनंदपुर साहिब की धरती को नमन करते हुए ‘ऐसी पावन धरती नूं मैं बार-बार नमस्कार करूं, मुगली तख्त तुर्क धुर कंबिया, दिल हिल्या पहारां मा’ काव्य पंक्तियां प्रस्तुत कीं। डॉ. सुदर्शन गासो ने मंच संचालन करने के साथ-साथ अपनी पंजाबी कविताओं को सुव्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत किया। हरियाणा महिला आयोग की सदस्य डॉ. अनुकंपा गर्ग ने कहा कि समाज को सही दिशा देने के लिए ऐसे कार्यक्रम बहुत जरूरी हैं।
अकादमी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. कुलदीप चंद अग्निहोत्री जी ने पुआधी बोली के बारे में बताया कि खालसा की उत्पत्ति श्री आनंदपुर साहिब में पुआध से हुई। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज का मनोविज्ञान उसकी स्थानीय भाषा से ही जाना जा सकता है। मुख्य भाषा से किसी व्यक्ति के मन की बात तो समझी जा सकती है, लेकिन दिल की गहराई को नहीं समझा जा सकता। अकादमी के मेंबर सेक्रेटरी एस. मंजीत सिंह ने कहा कि भविष्य में भी भाषा और संस्कृति के बारे में जागरूकता पैदा करने के लिए ऐसे प्रोग्राम करवाए जाएंगे।
अकादमी के पंजाबी विभाग के डायरेक्टर ने मेहमानों और कवियों का धन्यवाद किया और कहा कि कविता की कला भगवान का तोहफा है। इंसान सुर, लय वगैरह तो समझ सकता है, लेकिन शब्दों और विचारों को सिर्फ कवि का दिल ही व्यक्त कर सकता है।